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वट सावित्री व्रत 2018: पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है यह व्रत, जानिए क्या है मान्यताएं
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 15 May 2018 09:21 AM IST
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ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वट पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। इस बार 15 मई, मंगलवार को वट सावित्री व्रत मनाया जाएगा। इस दिन जो विवाहिता उपवास रखती हैं उन्हें अखंड सौभाग्य का फल प्राप्त होता है। इस व्रत में बरगद के पेड़ की विशेष पूजा की जाती है।
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महिलाएं क्यों करती हैं वट वृक्ष की पूजा
ऐसी मान्यता है इसी दिन सावित्री ने अपने कठिन तप के बल से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों का रक्षा की थी। इस दिन वट वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा और कथा सुनी जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पीपल वृक्ष की तरह बरगद में भी मां लक्ष्मी का वास माना जाता है ।
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इस व्रत में चने को प्रसाद में रूप में चढ़ाने का नियम है। कथा के अनुसार जब यमराज सत्वान के प्राण ले जाने लगे तो सावित्री भी उनके पीछे पीछे चलने लगी। ऐसे में यम ने उन्हें तीन वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने एक वरदान में सौ पुत्रों की माता बनना मांगा और जब यम ने उन्हें ये वरदान दिया तो सावित्री ने कहा कि वे पतिव्रता स्त्री है और बिना पति के मां नहीं बन सकती। यमराज को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने चने के रूप में सत्यवान के प्राण दे दिए। सावित्री ने सत्यवान के मुंह में चना रखकर फूंक दिया, जिससे वे जीवित हो गए। तभी से इस व्रत में चने का प्रसाद चढ़ाने का नियम है।
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ऐसे करें व्रत
महिलाएं इस दिन उपवास रखती हैं और वट वृक्ष के नीचे बैठ कर पूजा आराधना करती हैं। एक बांस की टोकरी मे सात तरह के अनाज रखते जिसे कपड़े के दो टुकड़े से ढ़क देते है दूसरी टोकरी में सावित्री की प्रतिमा रखते है फिर वट वृक्ष को जल,अक्षत,कुमकुम से पूजा करते है फिर लाल मौली से वृक्ष के सात बार चक्कर लगाते हुए ध्यान करते हैं। इसके बाद सभी महिलाएं सावित्री की कथा सुनाती है फिर दान दक्षिणा देती हैं।