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Utpanna Ekadashi 2020: क्यों खास माना जाता है उत्पन्ना एकादशी व्रत, जानें व्रत विधि और महत्व

Wed, 09 Dec 2020 03:48 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Wed, 09 Dec 2020 03:48 PM IST
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Utpanna Ekadashi 2020 vrat vidhi and katha of Utpanna Ekadashi
उत्पन्ना एकादशी 2020 - फोटो : अमर उजाला

Utpanna Ekadashi 2020: मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। उत्पन्ना एकादशी 11 दिसंबर को है। इस दिन उत्पन्ना एकादशी का व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति उत्पन्ना एकादशी का व्रत करता है उस पर भगवान विष्णु जी की असीम कृपा बनी रहती है। पौराणिक शास्त्रों में सभी व्रतों में एकादशी व्रत को महत्वपूर्ण बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी एक देवी हैं जिनका जन्म मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु जी से हुआ था। मान्यता है कि यह एकादशी का व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्रत करने वालों के सभी पाप मिट जाते हैं।

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Utpanna Ekadashi 2020 vrat vidhi and katha of Utpanna Ekadashi
उत्पन्ना एकादशी व्रत विधि - फोटो : सोशल मीडिया
उत्पन्ना एकादशी व्रत विधि

एकादशी के दिन सुबह उठकर व्रत का संकल्प कर शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए। इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य आदि सोलह सामग्री से भगवान श्रीकृष्ण का पूजन, और रात को दीपदान करना चाहिए।उत्पन्ना एकादशी की रात भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करना चाहिए। व्रत की समाप्ति पर श्री हरि विष्णु से अनजाने में हुई भूल या पाप के लिए क्षमा मांगनी चाहिए। अगली सुबह यानी द्वादशी तिथि पर पुनः भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। भोजन के बाद ब्राह्मण को क्षमता के अनुसार दान देकर विदा करना चाहिए।

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Utpanna Ekadashi 2020 vrat vidhi and katha of Utpanna Ekadashi
उत्पन्ना एकादशी व्रत का महत्व - फोटो : सोशल मीडिया
उत्पन्ना एकादशी व्रत का महत्व

मान्यता है कि जो मनुष्य उत्पन्ना एकादशी का व्रत पूरे विधि- विधान से करता है, वह सभी तीर्थों का फल व भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त करता है। व्रत के दिन दान करने से लाख गुना वृद्धि के फल की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति निर्जल संकल्प लेकर उत्पन्ना एकादशी व्रत रखता है, उसे मोक्ष व भगवान विष्णु की प्राप्ति होती है। ये व्रत रखने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से अश्वमेघ यज्ञ, तीर्थ स्नान व दान आदि करने से भी ज्यादा पुण्य मिलता है।

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Utpanna Ekadashi 2020 vrat vidhi and katha of Utpanna Ekadashi
उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा - फोटो : सोशल मीडिया

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा
ऐसा माना जाता है कि स्वयं श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशी माता के जन्म की कथा सुनाई थी। यह कथा कुछ इस प्रकार थी - सतयुग के समय मुर नाम का राक्षस था। उसने अपनी शक्ति से स्वर्ग लोक को जीत लिया था। ऐसे में इंद्रदेव ने विष्णुजी से मदद मांगी। विष्णुजी का मुर दैत्य से युद्ध आरंभ हो गया, जो कई वर्षों तक चला। अंत में विष्णु जी को नींद आने लगी तो वे बद्रिकाश्रम में हेमवती नामक गुफा में विश्राम करने चले गए। मुर भी उनके पीछे पहुंचा और सोते हुए भगवान को मारने के लिए बढ़ा तभी अंदर से एक कन्या निकली और उसने मुर से युद्ध किया। घमासान युद्ध के बाद कन्या ने मुर का मस्तक धड़ से अलग कर दिया गया। जब विष्णु की नींद टूटी तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि यह कैसे हुआ? कन्या ने सब विस्तार से बताया। वृत्तांत जानकर विष्णु ने कन्या को वरदान मांगने के लिए कहा। कन्या ने मांगा कि अगर कोई मनुष्य मेरा उपवास करे तो उसके सारे पाप नाश हो जाएं और उसे बैकुंठ लोक की प्राप्ति हो। तब भगवान ने उस कन्या को एकादशी नाम दिया और वरदान दिया कि इस व्रत के पालन से मनुष्य जाति के पापों का नाश होगा और उन्हें विष्णु लोक मिलेगा।

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