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Kartik Purnima 2018: कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान ही नहीं दान और दर्शन भी दिलाता है मोक्ष
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 23 Nov 2018 09:35 AM IST
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श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान
- फोटो : अमर उजाला
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार आज के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए इसे त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता यह भी है कि कार्तिक पूर्णिमा की शाम भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार उत्पन्न हुआ था। मान्यता है कि आज के दिन सभी देवतागण मनुष्यों के संग गंगा तट पर दीपावली मनाने के लिए आते हैं।
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कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार मां गंगा जी भगवान विष्णु के अंगूठे से निकली हैं, जिसका पृथ्वी पर अवतरण भगीरथ के प्रयास से हुआ है। आज कार्तिक पूर्णिमा के पावन दिन गंगा स्नान और दीपदान का बहुत ज्यादा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि आज के दिन गंगा स्नान करने पर एक हजार बार गंगा स्नान का फल मिलता है। मासानां कार्तिक: श्रेष्ठ:। अर्थात् 12 मासों में कार्तिक मास सर्वश्रेष्ठ माना गया है। मां गंगा जीवन की शुरुआत से लेकर अंत तक जुड़ी रहती है। ऐसे में इस पावन मास की पूर्णिमा के दिन गंगा जी में स्नान करने बहुत पुण्य फल मिलता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान से न सिर्फ इस जन्म के बल्कि पूर्व जन्म के भी पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। मां गंगा के अमृत रूपी जल में डुबकी लगाने से तन और मन दोनों शुद्ध हो जाता है। मां गंगा के स्नान, पूजन और मनन से रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान की प्राप्ति होती है तथा समस्त पापों का क्षय होता है।
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इन चीजों का करें दान
कार्तिक मास प्रकाश पर्व एवं दीपदान के लिए जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के पश्चात् गंगा तट पर दीपदान करने से दस यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है। साथ ही साथ आज कार्तिक पूर्णिमा के दिन हमें चावल का दान देना चाहिए। आज के दिन गोसेवा भी का काफी महत्व है। इसलिए गोमाता का आशीर्वाद पाने के लिए गाय को हरी घास खिलाएं। साथ ही धान्य, बीज, चांदी, नमक आदि का यथाशक्ति दान करना चाहिए। आज कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान सूर्य को सुबह और शाम को चंद्र देव को अर्घ्य देना न भूलें।
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दान में न आए अभिमान
ध्यान रहे किसी भी कामना से दिए जाने वाले दान में श्रद्धा और विश्वास का महत्वपूर्ण स्थान होता है। दान देते समय इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि हम जो कुछ भी दान दें उसे देते समय हमारे मन में किसी प्रकार का अहंकार या तिरस्कार की भावना नहीं आना चाहिए। बल्कि भावना ये होनी चाहिए कि हम जो कुछ भी दे रहे हैं वह ईश्वर प्रदत्त है, उसी का है, पुन: उसी को समर्पित कर रहा हूं।
यदि न पहुंच पाएं गंगा तट...
आज यदि आप गंगा तट पर न जा सकें तो अपने घर में ही स्नान के लिए प्रयोग में लाने वाले जल में थोड़ा सा गंगा जल मिलाकर,मां गंगा और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए स्नान करें।