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Holi 2019: क्यों मनाई जाती है होली, इसके पीछे है 4 कारण
Tue, 12 Mar 2019 12:59 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 12 Mar 2019 12:59 PM IST
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होली 2019
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रंग और उमंग का पर्व होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को बड़े ही उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस बार होली का त्योहार 21 मार्च को है। होली के एक दिन पहले होलिका दहन होता है। होली के दिन लोग मस्ती के रंग में डूबकर फाल्गुन के गीत गाते हैं और टोलियों संग मस्ती करते हैं। भारत में होली क्यों मनाई जाती है इसके पीछे कई कारण है।
पहला कारण
होली मनाए जाने के पीछे सबसे प्रचलित मान्यता विष्णु भक्त प्रह्राद के द्वारा हिरण्यकश्यप की बहन होलिका का वध करना है। हिरण्यकश्यप एक राक्षस था जिसका प्रह्राद नाम का पुत्र था। प्रह्राद भगवान विष्णु का बड़ा भक्त था लेकिन हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु का घोर विरोधी था। वह नहीं चाहता था कोई उसके राज्य में भगवान विष्णु की पूजा करें। प्रह्राद भगवान विष्णु की पूजा में दिन रात लीन रहते थे जिसके चलते हिरण्यकश्यप अपने पुत्र को मारने का कई बार प्रयास कर चुका था लेकिन बार-बार असफल हो जाता था। तब हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रह्राद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को भेजा।
दूसरा कारण
एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा पूतना नाम की राक्षसी का वध करना भी माना जाता है। पूतना राक्षसी के वध के बाद बृजवासी खुशी के चलते आपस में रंग खेलते है।
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तीसरा कारण
एक मान्यता भगवान शिव से जुड़ी हुई है जिसमें फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को शिव गण रंग लगाकर नाचते और गाते है।
चौथा कारण
मुगलकाल के समय में भी भारत में होली मनाई जाती है। इतिहास में बादशाह अकबर का जोधाबाई के साथ होली खेलने का वर्णन मिलता है। मुगल काल में इसे ईद-ए-गुलाबी कहा जाता था। तब लोग एक दूसरे के ऊपर रंगों की बौछार करके होली का त्योहार मनाते थे।
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पहला कारण
होली मनाए जाने के पीछे सबसे प्रचलित मान्यता विष्णु भक्त प्रह्राद के द्वारा हिरण्यकश्यप की बहन होलिका का वध करना है। हिरण्यकश्यप एक राक्षस था जिसका प्रह्राद नाम का पुत्र था। प्रह्राद भगवान विष्णु का बड़ा भक्त था लेकिन हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु का घोर विरोधी था। वह नहीं चाहता था कोई उसके राज्य में भगवान विष्णु की पूजा करें। प्रह्राद भगवान विष्णु की पूजा में दिन रात लीन रहते थे जिसके चलते हिरण्यकश्यप अपने पुत्र को मारने का कई बार प्रयास कर चुका था लेकिन बार-बार असफल हो जाता था। तब हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रह्राद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को भेजा।
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दूसरा कारण
एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा पूतना नाम की राक्षसी का वध करना भी माना जाता है। पूतना राक्षसी के वध के बाद बृजवासी खुशी के चलते आपस में रंग खेलते है।
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तीसरा कारण
एक मान्यता भगवान शिव से जुड़ी हुई है जिसमें फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को शिव गण रंग लगाकर नाचते और गाते है।
चौथा कारण
मुगलकाल के समय में भी भारत में होली मनाई जाती है। इतिहास में बादशाह अकबर का जोधाबाई के साथ होली खेलने का वर्णन मिलता है। मुगल काल में इसे ईद-ए-गुलाबी कहा जाता था। तब लोग एक दूसरे के ऊपर रंगों की बौछार करके होली का त्योहार मनाते थे।