Dev Uthani Ekadashi 2020: इस बार देवउठनी एकादशी व्रत का मिलेगा दोगुना लाभ, बन रहा है ये शुभ संयोग

धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 25 Nov 2020 06:38 AM IST
विज्ञापन
देवउठनी एकादशी 2020
देवउठनी एकादशी 2020 - फोटो : Rohit Jha

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
देवउठनी एकादशी 25 नवंबर बुधवार को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं। शास्त्रों में इस एकादशी का बड़ा महत्व बताया गया है। इसे देवोत्थान और देव प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाता है। देवउठनी एकादशी के बारे में मान्यता है कि भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा के बाद इसी तिथि पर जागते हैं। 
विज्ञापन


देवउठनी पर भगवान विष्णु के जागने के बाद सभी तरह के मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। इस तिथि पर तुलसी विवाह भी किया जाता है। सभी एकादशियों में देवउठनी एकादशी व्रत को अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इसी के साथ चतुर्मास भी समाप्त हो जाएगा। देवउठनी एकादशी के बाद विवाह कार्यक्रम फिर से आरंभ हो जाएंगे।




2020 में तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त
कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 25 नवंबर बुधवार के दिन रात 2 बजकर 43 मिनट से शुरू होगी। जबकि इस तिथि का समापन 26 नवंबर, गुरुवार की सुबह 05 बजकर 11 मिनट पर होगा। ऐसे में एकदशी तिथि 25 नवंबर को पूरे दिन रहेगी। इस एकादशी व्रत का पारण 26 नवंबर की सुबह 10 बजे तक किया जा सकेगा। 

बन रहे हैं कई शुभ योग
हिन्दू पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि के दिन कई शुभ योग पड़ रहे हैं। एकादशी तिथि की शुरूआत सर्वाथसिद्धि योग से हो रही है। ज्योतिष विज्ञान में इस योग को अति शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। इस दिन रवि योग और सिद्धि योग भी बन रहा है। रवि योग का संबंध सूर्यदेव से है। यह योग कई अशुभ योगों और ग्रहों के अशुभ प्रभावों को दूर करने वाला है। जबकि सिद्धि योग में किए गए कार्य सिद्ध होते हैं। 

व्रती को मिलेगा बेहद शुभ फल
देवउठनी एकादशी के दिन व्रत रखने वाले जातकों को व्रत का दोगुना फल मिलेगा। भगवान विष्णु जी उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करेंगे। यदि आप इस दिन कोई भूमि या वाहन खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए यह बेहद ही उत्तम समय होगा। इसके साथ ही आप इस दिन कोई नया व्यापार भी शुरू कर सकते हैं। इन योगों का आपको बेहद लाभ मिलने वाला है।

 देवउठनी एकादशी का पौराणिक महत्व
भगवान विष्णु के चार महीनों के लिए निद्रा में जाने के पीछे एक कथा है। जिसके अनुसार एक बार भगवान विष्णु से उनकी प्रिया लक्ष्मी जी ने आग्रह भाव में कहा-हे प्रभु! आप दिन-रात जागते हैं लेकिन,जब आप सोते हैं तो फिर कई वर्षों के लिए सो जाते हैं।ऐसे में समस्त प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए आप नियम से ही विश्राम किया कीजिए। आपके ऐसा करने से मुझे भी कुछ समय आराम मिलेगा। लक्ष्मी जी की बात सुनकर नारायण मुस्कुराए और बोले-'देवी'! तुमने उचित कहा है। मेरे जागने से सभी देवों और खासकर तुम्हें मेरी सेवा में रहने के कारण विश्राम नहीं मिलता है। इसलिए आज से मैं हर वर्ष चार मास वर्षा ऋतु में शयन किया करूंगा। मेरी यह निद्रा अल्पनिद्रा और योगनिद्रा कहलाएगी जो मेरे भक्तों के लिए परम मंगलकारी रहेगी। इस दौरान जो भी भक्त मेरे शयन की भावना कर मेरी सेवा करेंगे,मैं उनके घर तुम्हारे सहित सदैव निवास करूंगा। 

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X