फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   anant chaturdashi 2019 importance of anant chaturdashi vrat

अनंत चतुर्दशी 2019: अनंत सूत्र से होती है श्री हरि का पूजन

Sun, 08 Sep 2019 11:51 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 08 Sep 2019 11:51 AM IST
विज्ञापन
anant chaturdashi 2019 importance of anant chaturdashi vrat
अनंत चतुर्दशी 2019

भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह 12 सितंबर को है। शास्त्रों में इस दिन व्रत रखने के साथ ही भगवान विष्णु के अनंत स्वरुप की पूजा का विधान है। अनंत चतुर्दशी की पूजा में सूत्र का बड़ा महत्व है। यह अनंत सूत्र सूत के धागे को हल्दी में भिगोकर 14 गाँठ लगाकर तैयार किया जाता है। इसे हाथ या गले में धारण किया जाता है। हर गाठ में श्री नारायण के विभिन्न नामों से पूजा की जाती है।

विज्ञापन


पहले में अनंत,उसके बाद ऋषिकेश,पद्मनाभ,माधव,वैकुण्ठ,श्रीधर,त्रिविक्रम,मधुसूदन,वामन,केशव,नारायण,दामोदर,और गोविन्द की पूजा होती है। मान्यता है कि इस अनंत सूत्र को बांधने से व्यक्ति प्रत्येक कष्ट से दूर रहता है। जो मनुष्य विधिपूर्वक इस दिन श्री हरि की पूजा करता है उसे सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है। इस दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है जिसके चलते इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
विज्ञापन


ये है पूजा का विधान-
इस दिन कलश स्थापना करके उस पर सुंदर लोटे में कुश रखना चाहिए। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने केसर,रोली और हल्दी से रंगे हुए सूत के डोरे रखकर उनकी गंध,पुष्प,अक्षत,धूप-दीप आदि से पूजा करें। मिष्ठान आदि का भोग लगाएं एवं अनंत भगवान का ध्यान करते हुए सूत्र धारण करें। यह डोरा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला तथा अनंत फल देने वाला माना गया है। इस दिन श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करना बहुत उत्तम माना जाता है। इस दिन लोग घरों में सत्यनारायण की कथा भी करवाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


जब पांडवों के हुए कष्ट दूर-
महाभारत की एक कथा के अनुसार जब कौरवों ने छल से जुए में पांडवों को हरा दिया था। इसके बाद पांडवों को अपना राजपाट त्याग कर वनवास जाना पड़ा। वहां उन्होंने बहुत कष्ट उठाए। ऐसे में जब एक दिन भगवान श्रीकृष्ण पांडवों से मिलने वन आए तो युधिष्ठिर ने उनसे पूछा कि इस पीड़ा से निकलने का और दोबारा राजपाट प्राप्त करने का क्या उपाय है। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि आप सभी भाई पत्नी समेत भाद्र शुक्ल चतुर्दशी का व्रत रखें और अनंत भगवान की पूजा करें। इस पर युधिष्ठिर ने अनंत भगवान के बारे में जिज्ञासा प्रकट की तो कृष्ण जी ने कहा कि वह भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं। चतुर्मास में भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर अनंत शयन में रहते हैं। इनके आदि और अंत का पता नहीं है इसीलिए ये अनंत कहलाते हैं। इनके पूजन से आपके सभी कष्ट समाप्त हो जाएंगे। तब युधिष्ठिर ने परिवार सहित यह व्रत किया और उन्हें पुन: हस्तिनापुर का राज-पाट प्राप्त हुआ।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed