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अनंत चतुर्दशी 2018: जानिए क्यों होती है इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 23 Sep 2018 11:05 AM IST
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अनंत चतुर्दशी व्रत
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आज अनंत चतुर्दशी व्रत है। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ती है। शास्त्रों में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व होता है। अंनत चतुर्दशी पर 10 दिनों तक चलने वाला गणेश उत्सव का विसर्जन किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष रूप से पूजा-आराधना की जाती है। अनंत चतुर्दशी पर देश के कई हिस्सों में गणेश विसर्जन बड़ी धूम-धाम के साथ मनाई जाती है।
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अनंत चतुर्दशी कथा
अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णुजी की पूजा बेहद ही खास मानी जाती है। भगवान विष्णु अनंत चतुर्दशी का व्रत करने वाले भक्तों के कष्टों को दूर करते हैं और घर में धन संपन्नता लाकर उसकी विपन्नता को समाप्त कर देते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत में जब युधिष्ठिर कौरवों के साथ जुए में अपना समस्त राज्य हार बैठे थे। तब पांडवों के दुख दूर करने के लिए भगवान कृष्ण ने अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने को कहा था। तब पांडवों ने इस व्रत को रखा था जिसके बाद पांडवों को वापस अपना राज्य मिल गया था।
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पूजन विधि
इस व्रत में भक्तों को एक समय भोजन करना चाहिए और आटे, शक्कर और घी का मिला हुआ मालपुआ भगवान को समर्पित करना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु के रोम से उत्पन्न 14 गांठों वाली दूर्वांकुर और 14 गांठ लगा हुआ रेशम का धागा लाकर रखें। रंगे हुए चावलों से सर्वतोभद्र मंडल बनाकर उसमें तांबे का कलश रखें। कलश के उपर पीले वस्त्र रखें। पुन: भगवान अनंत की प्रतिमा स्थापित करके, विधिपूर्वक पूजन करने के साथ-साथ ही शिव, गणेश, षोडशमात्रिका एवं नवग्रह तथा लोकपाल आदि का पूजन अलग-अलग करें।
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अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त
अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त – 06:14 (23 सितंबर ) से 07:17 (24 सितंबर )
चतुर्दशी तिथि आरंभ – 05:43 (23 सितंबर )
चतुर्दशी तिथि समाप्त -07:17 (24 सितंबर)