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स्मार्ट बेटी: घर की आर्थिक मदद करते हुए आगे बढ़ रही है रोली

Mon, 19 Nov 2018 05:40 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Updated Mon, 19 Nov 2018 05:40 PM IST
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Smart Beti: Roli is moving forward while helping her family financially
women empowerment

रोली के गांव में भी बेटियां मां-बाप के लिए बोझ मानी जाती हैं और इसीलिए 16 तक पहुंचते पहुंचते उनको ब्याह दिया जाता है। श्रावस्ती के लखाहीखास गांव की रोली मिश्रा की बहनों के साथ भी ऐसा ही हुआ लेकिन रोली ने अपना बाल विवाह नहीं होने दिया। अपनी पढ़ाई जारी रखने के साथ ही उसने सिलाई करके घर की आमदनी में हजार-डेढ़ हजार का इजाफा किया है।

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लखाहीखास गांव में बाल विवाह आम बात है। बेटी 12-13 साल की हुई नहीं कि गांव-समाज से आवाजें आने लगती हैं कि बेटी सयानी हो गई है, अब इसका ब्याह कर देना चाहिए। सामजिक आर्थिक मजबूरियों के नाम पर अधिकतर यह दबाव ही जीतता है और बेटियों का हक मारा जाता है।

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लेकिन धुन की पक्की रोली ने अपना बाल विवाह तो रोका ही, साथ ही यह भी तय किया है कि पढ़-लिख कर शिक्षिका बनेगी। पढ़ाई और सिलाई में उसकी कुशलता देखकर माता-पिता ने भी उसका साथ दिया है।रोली के आगे बढ़ते कदमों की संक्षिप्त वीडियो कथा बनाई है स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी सुमन देवी ने।

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अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।


 

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