{"_id":"5bd1d954bdec22696d780f23","slug":"knocked-every-door-of-help-than-save-ekta","type":"story","status":"publish","title_hn":"मदद की आस का हर दर खटखटाया, तब बची एकता","category":{"title":"Smart Beti","title_hn":"स्मार्ट बेटी","slug":"smart-beti"}}
मदद की आस का हर दर खटखटाया, तब बची एकता
अमर उजाला ब्यूरो,
Updated Thu, 25 Oct 2018 08:25 PM IST
विज्ञापन
Demo Pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलरामपुर जिले के रानीजोत गांव की एकता की पढ़ाई दो साल पहले ही 7वीं क्लास में रुकने वाली थी। अबतक उसकी शादी भी हो जाती। लेकिन मदद की उम्मीद का हर संभव दरवाजा खटखटा कर एकता ने आखिरकार अपने को बचा लिया।
एकता के गांव में भी और उसके घर में भी लड़कियों की पढ़ाई के बारे में सोच यही थी कि ज्यादा पढ़ाने से कोई फायदा नहीं। जल्दी शादी करो बेटी की और विदा करो। अपने अधिकार के लिए आवाज उठाने का साहस एकता को ए.एन.एम. दीदी की गांव की कुछ लड़कियों के साथ हो रही एक मीटिंग के दौरान मिला।
उसके बाद एकता ने ठान लिया कि अपने पैरों पर इस तरह खड़े होना है कि अपने परिवार की मदद करने की हैसियत बने। आज वह 9वीं क्लास में पढ़ रही है और बेहतर भविष्य के हौसले से भरी है। एकता के जीवन में आये इस बड़े बदलाव की छोटी वीडियो कथा तैयार की है स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी श्वेता शुक्ला ने।
विज्ञापन
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।
विज्ञापन
एकता के गांव में भी और उसके घर में भी लड़कियों की पढ़ाई के बारे में सोच यही थी कि ज्यादा पढ़ाने से कोई फायदा नहीं। जल्दी शादी करो बेटी की और विदा करो। अपने अधिकार के लिए आवाज उठाने का साहस एकता को ए.एन.एम. दीदी की गांव की कुछ लड़कियों के साथ हो रही एक मीटिंग के दौरान मिला।
विज्ञापन
उसके बाद एकता ने ठान लिया कि अपने पैरों पर इस तरह खड़े होना है कि अपने परिवार की मदद करने की हैसियत बने। आज वह 9वीं क्लास में पढ़ रही है और बेहतर भविष्य के हौसले से भरी है। एकता के जीवन में आये इस बड़े बदलाव की छोटी वीडियो कथा तैयार की है स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी श्वेता शुक्ला ने।
विज्ञापन
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।