उत्तराखंड बजट सत्र: सदन में गरमाया खनन, शराब और भ्रष्टाचार का मुद्दा, पक्ष-विपक्ष में तीखी बहस
प्रदेश सरकार की ओर से अवैध खनन रोकने के लिए ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जा रही है। जिलास्तर पर डीएम की अध्यक्षता में खनन निरोधक दस्ता गठित किया गया है। बीते तीन वर्षों में खनन से राजस्व बढ़ा है।
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विधानसभा सत्र के चौथे दिन सदन में खनन का मु्ददा गरमाया। सरकार के जवाब से अंसतुष्ट विपक्ष ने सदन से बर्हिगमन किया। शुक्रवार को सदन में कांग्रेस विधायक विरेंद्र कुमार के प्रश्न के जवाब में संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि प्रदेशभर में 4366.376 हेक्टेयर भूमि पर 208 खनन पट्टों की स्वीकृति दी गई। इन पट्टों पर जेसीबी से खनन करने की अनुमति नहीं है। तीन मीटर गहराई तक खनन किया जा सकता है। प्रदेश सरकार की ओर से अवैध खनन रोकने के लिए ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जा रही है। जिलास्तर पर डीएम की अध्यक्षता में खनन निरोधक दस्ता गठित किया गया है। बीते तीन वर्षों में खनन से राजस्व बढ़ा है।
वर्ष 2022-23 में 472.32 करोड़, 2023-24 में 645.46 करोड़ व 2024-25 में 1040.57 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। सरकार ने अवैध खनन, परिवहन व भंंडारण पर कार्रवाई की है। 2252 मामलों में 82.12 करोड़ की वसूली की गई। जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष में जनवरी माह तक 1553 मामलों में 39.08 करोड़ की वसूली की है।
कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने कहा, भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह व विधायक अरविंद पांडे ने प्रदेश में अवैध खनन का मामला उठाया था। सरकार सदन में कह रही अवैध खनन नहीं हो रहा है। विधायक काजी निजामुद्दीन, अनुपमा रावत ने अवैध खनन का मुद्दा रखा। सरकार के जवाब से अंसतुष्ट कांग्रेस ने सदन की कार्यवाही का बर्हिगमन किया।
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सदन में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तीखी बहस
सत्र के पांचवें दिन सदन में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। चर्चा के दौरान भाजपा विधायक मुन्ना चौहान व कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह के बीच तकरार हुई। दोनों ने एक-दूसरे पर व्यक्तिगत आरोप लगाए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने पीठ से व्यक्तिगत आरोप न लगाने के निर्देश दिए। साथ ही आरोपों को कार्यवाही से हटाया गया।
कांग्रेस ने नियम 310 के तहत भ्रष्टाचार के मुद्दे को सदन में उठाया। इस पर नियम 58 के तहत चर्चा की गई। विपक्ष की ओर से लगाए भ्रष्टाचार के आरोप का जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने कहा, सरकार ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश में पहली बार आईएएस, आईएफएस जैसे अधिकारियों को निलंबित किया गया है। देहरादून जिले में डाकपत्थर की रिक्त भूमि मास्टर प्लान बनाने के उद्देश्य से एक विभाग से लेकर दूसरे विभाग को दी गई है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि काम में देरी के चलते पूर्व में चयनित एजेंसी को बदलने का काम किया गया। एजेंसी के खिलाफ वसूली की कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने विपक्ष द्वारा स्मार्ट सिटी परियोजना में ई-बसों की खरीद पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए, अब तक देहरादून के विभिन्न मार्गों के 76 लाख से अधिक यात्री ई-बस सेवा का लाभ उठा चुके हैं।
सरकार ने जहां भी भ्रष्टाचार की शिकायत मिली वहां जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की है। पहली बार जिलाधिकारी से लेकर पीसीसीएफ रैंक के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। चार साल में विजिलेंस ने 92 मामलों में 108 लोगों को ट्रैप किया है। साथ ही विजिलेंस को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ट्रैप के लिए दो करोड़ का कॉरपस फंड बनाने के साथ ही अतिरिक्त पद भी सृजित किए गए हैं।
इसी तरह नौकरियों में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू करने के साथ ही चयन बोर्ड के अधिकारियों तक को जेल भेजने का काम किया है। स्थानीय बेरोजगारों के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने दस करोड़ रुपये तक के ठेके स्थानीय ठेकेदारों को देने का काम किया है। विकास प्राधिकरणों में ऑनलाइन माध्यम से मानचित्र स्वीकृत किए जा रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन सुशासन का मॉडल बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि सरकार की पारदर्शी नीतियों के कारण खनन राजस्व 300 करोड़ से बढ़कर 1200 करोड़ तक पहुंच गया है। सरकार ने अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाई है।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल, विधायक प्रीतम सिंह, भुवन कापड़ी, हरीश धामी ने कई मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। कहा, कैग की रिपोर्ट में 644 करोड़ के कार्येां में वित्तीय अनियमितता सामने आई। जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार का भ्रष्टाचार एजेंडा है। सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।