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'अफीम की खेती करने वाले को बचा रही बीजेपी': भाजपा का जवाब- जो खुद नशे का संरक्षक, उन्हें बोलने का हक नहीं

Sat, 14 Mar 2026 06:04 PM IST
Lalit Kumar Singh अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Sat, 14 Mar 2026 06:04 PM IST
सार

CG Politics on Opium farming: छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती को लेकर जमकर राजनीति की जा रही है। कांग्रेस और बीजेपी एक दूसरे पर हमलावर हैं।

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CG Politics: BJP and Congress Allegations on Opium farming
प्रेस कॉन्फ्रेंस लेते छत्तीसगढ़ कांग्रेस, प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता नलिनीश ठोकने - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

CG Politics on Opium farming: छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती को लेकर जमकर राजनीति की जा रही है। कांग्रेस और बीजेपी एक दूसरे पर हमलावर हैं। मामले में एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। इसी क्रम में आज शनिवार को प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने पत्रकार वार्ता लेकर कहा कि प्रदेश में अफीम की खेती में भाजपा का पूरा शीर्ष नेतृत्व शामिल है। दुर्ग में अफीम खेती का सरगना विनायक ताम्रकार के भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ मधुर संबंध थे। 
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उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के राष्ट्रीय प्रभारी अजय जामवाल, बीएल संतोष, केन्द्रीय मंत्री तोखन साहू, केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, दुर्ग सांसद विजय बघेल, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, गृह मंत्री विजय शर्मा भाजपा संगठन के दर्जनों नेताओं के साथ उसकी फोटो और भाजपा के कार्यक्रमो में उसकी सक्रिय सहभागिता बताती है। अफीम की खेती के पीछे विनायक ताम्रकार एक छोटा मोहरा है। असली में पूरी भाजपा को उसका संरक्षण मिला हुआ है। इस काले धंधे में सभी शामिल थे। राज्य में अफीम की खेती की निष्पक्ष जांच होनी चाहिये। बिना सरकार के संरक्षण के पूरे प्रदेश में नशे का इतना बड़ा कारोबार संभव नहीं है। भाजपा ने विनायक ताम्रकार को केवल निलंबित किया है, निष्कासित नहीं। उसे कौन बचा रहा है?
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विनायक ताम्रकार को क्यों बचा रही भाजपा?:सुशील आनंद शुक्ला 
सवाल उठाते हुए कहा कि विनायक ताम्रकार पुलिस ने मुख्य अभियुक्त क्यों नहीं बनाया? सरकार उसे क्यों बचा रही है? बलरामपुर में अफीम की खेती करने वाले को भाजपा के किस नेता का संरक्षण था, जनता जानना चाहती है? बलरामपुर में तो जिस जमीन पर अफीम की खेती हो रही थी, गिरदावरी में वहां अन्य फसल लगा होना बताया है, मतलब सरकारी अमले को पता था वहां अफीम की खेती हो रही थी, इसका मतलब साफ है कि सत्ता के संरक्षण में ही यह सब कुछ हो रहा है।
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'लिक्विड नशे" के सिंडिकेट के संरक्षकट 
दूसरी और प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता नलिनीश ठोकने ने कहा कि जो खुद "लिक्विड नशे" के सिंडिकेट के संरक्षक रहे हों, उन्हें नशे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।  अफीम की खेती के खुलासों के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जांच की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी और अवैध सम्पत्तियों की जब्ती आदि की कार्रवाइयों के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयानबाजी को पूर्व मुख्यमंत्री की राजनीतिक कुण्ठा और अपने सियासी वजूद को बचाए रखने की नाकाम कोशिश बताया है। ठोकने ने कहा कि बघेल आज अफीम की खेती और नशे के कारोबार के बारे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पूरी जानकारी इकठ्ठी करने के लिए ताकीद किया जा रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री रहते हुए बघेल को शराब और सूखे नशे के कारोबार को रोकने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को इस तरह की नसीहत देना मुनासिब क्यों नहीं लगा?

भूपेश को बोलने का हक नहीं: नलिनीश ठोकने
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ठोकने ने कहा कि जिस कांग्रेस ने अपने पांच साल के शासनकाल में छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी को नशे की गर्त में धकेला। आज उसी कांग्रेस के नेता बघेल नैतिक पतन की पराकाष्ठा पार कर भाजपा पर मिथ्या आरोप लगाकर अपनी ओछी राजनीति का प्रदर्शन कर रहे हैं। भूपेश सरकार के कार्यकाल में दो हजार करोड़ रुपए से अधिक का शराब घोटाला हुआ, जिसने छत्तीसगढ़ के राजस्व को चूना लगाया। आज उनके खुद के बेटे और करीबी सहयोगी जांच एजेंसियों के घेरे में हैं। जो खुद "लिक्विड नशे" के सिंडिकेट के संरक्षक रहे हों, उन्हें नशे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। 



'छत्तीसगढ़ को सूखे नशे का बना दिया था डंपिंग यार्ड'
ठोकने ने कहा कि साल 2018 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ को सूखे नशे का डंपिंग यार्ड बना दिया गया था। ओडिशा और अन्य राज्यों से आने वाले गांजे और सिंथेटिक ड्रग्स को कांग्रेस नेताओं के संरक्षण में प्रदेशभर में खपाया गया। आज जब भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार नशे के सौदागरों पर सख्त कार्रवाई कर रही है, तो कांग्रेस के पेट में दर्द हो रहा है। अफीम खेती के मामले में भाजपा जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलती है। जैसे ही किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आई, पार्टी ने तत्काल उसे निष्कासित किया और पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की। क्या भूपेश बघेल में अपने शासनकाल के दौरान घोटालेबाजों पर ऐसी कार्रवाई करने इतनी हिम्मत थी? एक तरफ कांग्रेस शराबबंदी का वादा कर सत्ता में आई थी और दूसरी तरफ घर-घर शराब पहुँचाने का काम किया। अब वे नशे के विरुद्ध आंदोलन का ढोंग कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं को नसीहतें दे रहे हैं! छत्तीसगढ़ की जनता भूली नहीं है कि कैसे नशे के कारोबार को भूपेश सरकार के समय फलने-फूलने का मौका दिया गया। तीखा तंज कसते हुए कहा कि भूपेश बघेल की राजनीति अब 'एक्स' (ट्विटर) और कोरी बयानबाजी तक सिमट गई है। छत्तीसगढ़ की जनता जानती है कि असली 'नशा माफिया' कौन है? इसलिए बघेल को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि भाजपा सरकार प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी भ्रामक प्रचार से हमारी सरकार रुकने वाली नहीं हैं।
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