नौणी विश्वविद्यालय की बड़ी कामयाबी: अब पूरा साल गाजर जूस का लीजिए मजा, पल्प से बनेंगे कुकीज
डॉ. वाईएस परमार प्रौद्योगिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी ने स्वाद और विटामिन से भरपूर गाजर जूस का कंसंट्रेट (शुद्ध व गाड़ा) बनाने में कामयाबी हासिल की है। गाजर का सीजन वर्ष में लगभग तीन माह तक रहता है, लेकिन जूस से अब साल भर गाजर के गुणों का लाभ उठाया जा सकेगा।
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सेब, अनार और अमरूद जैसे फलों की तर्ज पर अब गाजर का जूूस भी बाजार में उपलब्ध होगा। डॉ. वाईएस परमार प्रौद्योगिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी ने स्वाद और विटामिन से भरपूर गाजर जूस का कंसंट्रेट (शुद्ध व गाड़ा) बनाने में कामयाबी हासिल की है। गाजर का सीजन वर्ष में लगभग तीन माह तक रहता है, लेकिन जूस से अब साल भर गाजर के गुणों का लाभ उठाया जा सकेगा। यह बीटा कैरोटीन से भरपूर है, जिसमें आंखों के लिए फायदेमंद विटामिन ए मौजूद है। गाजर से न केवल जूस बनेगा, बल्कि बेकार समझकर फेंके जाने वाले इसके पल्प से कुकीज बनाने के अलावा कई तरह के बेकरी उत्पादों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। लंबे शोध के बाद नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने गाजर से कंसंट्रेट बनाने में सफलता प्राप्त की है।
दावा है कि प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में इस तरह का उत्पाद तैयार करने वाला यह पहला विश्वविद्यालय है। यह शोध नौणी विवि के फूड प्रोसेसिंग एंड साइंस टेक्नोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. केडी शर्मा और उनकी टीम ने किया है। डॉ. शर्मा ने बताया कि यह प्रयोग न केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से अहम है, बल्कि किसान इस तकनीक का इस्तेमाल आर्थिकी बढ़ाने के लिए भी कर सकते हैं। इसके लिए उत्पादकों को विवि से एमओयू साइन करना होगा। उसके बाद विवि इसकी तकनीक संबंधित उत्पादक अथवा उद्योग को हस्तांतरित करेगा। उन्होंने बताया कि विवि ने अपने इस उत्पाद का पेटेंट भी करवा लिया है। गाजर का यह जूस कंसंट्रेट के रूप में है, जिसका इस्तेमाल जूस बनाने में कर सकते हैं। यह बीटा कैरोटीन से भरपूर है, जिसमें आंखों के लिए फायदेमंद विटामिन ए मौजूद है। इसके लिए देश में पैदा होने वाली चार प्रकार की गाजर रेड, ऑरेंज, पर्पल और ब्लैक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
बक व्हीट व किन्नोआ में मिलाया जाएगा पल्प
डॉ. केडी शर्मा ने बताया कि गाजर का कंसंट्रेट निकालने के बाद जो पल्प बचता है, उसमें लगभग 50 फीसदी फाइबर और पोषक तत्व होते हैं। इसे पोषकता से भरपूर बक व्हीट और किन्नोआ के आटे में मिलाकर कई तरह के बेकरी उत्पाद जैसे कुकीज, केक, गाजर का इंस्टेंट हलवा आदि बनाया जा सकता है। विवि ने इसका सफल प्रयोग किया है। बक व्हीट जहां शरीर में कैंसर पैदा करने वाले टिश्यू को बनने से रोकता है, वहीं किन्नोआ वजन कम करने में सहायक है। गाजर के साथ मिलकर इसका गुण दोगुना हो जाएगा।