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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Mobile app ready: Leaf photo will reveal diseases in potato plant

मोबाइल एप तैयार: पत्ते के फोटो से आलू के पौधे में लगे रोगों का चलेगा पता

Fri, 22 Apr 2022 01:08 PM IST
Krishan Singh त्रिपुरारी सांख्यान, मंडी
त्रिपुरारी सांख्यान, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Fri, 22 Apr 2022 01:08 PM IST
सार

आईआईटी मंडी और केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र (सीपीआरआई) शिमला के शोधकर्ताओं ने ऐसा मोबाइल ऐप तैयार किया है, जिसमें पत्ते का फोटो खींचते ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पौधे के रोगग्रस्त होने या स्वस्थ होने की जानकारी मिल जाएगी।

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Mobile app ready: Leaf photo will reveal diseases in potato plant
आलू(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आलू के पौधे के पत्ते का फोटो ही अब फसल में लगे रोग की जानकारी दे देगा। आईआईटी मंडी और केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र (सीपीआरआई) शिमला के शोधकर्ताओं ने ऐसा मोबाइल एप तैयार किया है, जिसमें पत्ते का फोटो खींचते ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पौधे के रोगग्रस्त होने या स्वस्थ होने की जानकारी मिल जाएगी। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इसके ट्रायल की मंजूरी दे दी है। आमतौर पर आलू की फसल को ब्लाइट यानी झुलसा रोग लग जाता है। समय पर इसे न रोका जाए तो एक हफ्ते में पूरी फसल खराब हो जाती है। इसे जांचने के लिए विशेषज्ञों को खेतों में जाना होता है। बारीकी से जांच पर ही इसकी बीमारी का पता चलता है। नई तकनीक से सिर्फ पत्तों की फोटो से ही पता चल जाएगा कि फसल रोगग्रस्त है या नहीं। 

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इससे पहले शोधकर्ता जटिल कंप्यूटेशनल मॉडल से एक कंप्यूटर ऐप तैयार कर चुके हैं, लेकिन ऐप ज्यादा एमबी का होने से आम किसानों को इसका सही लाभ नहीं मिल पा रहा था। अब आईआईटी की टीम ने इसी एप को छोटा कर लगभग दस एमबी का बनाया है, ताकि इसे स्मार्टफोन पर बतौर एप्लीकेशन आसानी से उपलब्ध करवाया जा सके। इसे केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने भी ट्रायल की मंजूरी दे दी है। इस एप को आसानी से आम किसानों को उपलब्ध करवाया जा रहा है। यह मॉडल पूरे देश में काम आए, इस पर विशेष जोर दिया गया है। भारत में आलू की खेती लगभग 2.4 लाख हेक्टेयर जमीन पर की जाती है। सालाना उत्पादन करीब 24.4 लाख टन होता है। झुलसा रोग से 20 से 30 फीसदी पैदावार प्रभावित होती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है।
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इस कार्य को आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत श्रीनिवासन की देखरेख में सीपीआरआई शिमला के साथ मिलकर किया गया है। इस रिसर्च में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  टेक्नोलॉजी से पत्तों के रोगग्रस्त हिस्सों का पता लगाने में कामयाबी हासिल की है। इसके 95 फीसदी परिणाम सकारात्मक रहे हैं।
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लक्ष्मीधर बहारा, निदेशक आईआईटी मंडी

ऐसे करेगा काम
इस एप से रोगग्रस्त दिखने वाले पत्तों की फोटो लेने पर यह ऐप रीयल टाइम में कन्फर्म करेगा कि पत्ता खराब हो रहा है या नहीं। इससे किसान को समय पर पता चल जाएगा कि खेत में बीमारी को रोकने के लिए कब छिड़काव करना है, जिससे फसल खराब न हो।

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