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HP Shiva project: हिमाचल के लिए केंद्र से 1300 करोड़ की एचपी शिवा परियोजना मंजूर, इन फसलों को मिलेगा बढ़ावा

Sun, 18 Sep 2022 12:41 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 18 Sep 2022 12:41 PM IST
सार

एशियाई विकास बैंक इस परियोजना के लिए करीब 1036 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, जबकि शेष राशि राज्य सरकार खर्च करेगी।परियोजना के तहत सात जिलों कांगड़ा, बिलासपुर, हमीरपुर, ऊना, मंडी, सोलन और सिरमौर में यह परियोजना चलेगी।

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HP Shiva project of 1300 crores approved from the center for Himachal
फल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 1300 करोड़ रुपये की उपोष्णकटिबंधीय बागवानी, सिंचाई और मूल्यवर्धन (एचपी शिवा) परियोजना मंजूरी की है। एशियाई विकास बैंक इस परियोजना के लिए करीब 1036 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, जबकि शेष राशि राज्य सरकार खर्च करेगी।परियोजना के तहत सात जिलों कांगड़ा, बिलासपुर, हमीरपुर, ऊना, मंडी, सोलन और सिरमौर में यह परियोजना चलेगी। इन जिलों में संतरा, अमरूद, अनार, लीची, प्लम, जापानी फल, आम आदि उपोष्णकटिबंधीय फलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। सात जिलों के 28 विकास खंडों में लगभग 6,000 हेक्टेयर क्षेत्र में एचपी शिवा परियोजना क्रियान्वित होगी। इससे इन जिलों के 15,000 से अधिक किसान परिवार लाभान्वित होंगे। इस परियोजना में लगभग एक करोड़ फलदार पौधे रोपित होंगे, जिससे पर्यावरण का संरक्षण होगा और जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकेगा।

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बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने बताया कि परियोजना पांच साल के लिए वर्ष 2022-23 से 2027-28 तक चलेगी। परियोजना के अंतर्गत किसानों की निजी भूमि पर एक फसल एक क्लस्टर के तहत उपोष्णकटिबंधीय फलों के उत्पादन को बढ़ावा देंगे। मंत्री ने कहा कि एचपी शिवा परियोजना का मुख्य उद्देश्य बागवानों को स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना है, ताकि इन जिलों की युवा आबादी का रोजगार के लिए शहरी क्षेत्रों में पलायन रोका जा सके। राज्य के बागवानी सचिव अमिताभ अवस्थी ने कहा कि परियोजना के पायलट प्रोजेक्ट के तहत चार जिलों में कांगड़ा, बिलासपुर, हमीरपुर और मंडी के 12 ब्लॉक के 17 क्लस्टरों में 200 हेक्टेयर क्षेत्र पर संतरा, अमरूद, लीची और अनार का उच्च घनत्व पौधरोपण किया गया था, जिसके परिणाम सफल रहे थे। संतरा और अमरूद की फसलें तो फल देने के लिए तैयार भी हो चुकी हैं। 

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