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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Horticulture Department: GST is being deducted from horticulturist instead of companies in micro irrigation scheme

बागवानी विभाग: सूक्ष्म सिंचाई योजना में कंपनियों के बजाय बागवानों से काटा जा रहा जीएसटी

Tue, 29 Mar 2022 11:54 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 29 Mar 2022 11:54 AM IST
सार

बागवानी निदेशालय ने उपनिदेशकों को बागवानों से जीएसटी काटने के अजीबोगरीब फरमान जारी किए हैं। ऐसे में कहने को तो ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई के लिए सरकार 80 फीसदी उपदान दे रही है, लेकिन वास्तव में यह 68 प्रतिशत मिल रहा है। बागवानी विभाग ने ऑडिट की आपत्ति के बाद यह फैसला अपने स्तर पर लिया है।

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Horticulture Department: GST is being deducted from horticulturist instead of companies in micro irrigation scheme
सूक्ष्म सिंचाई योजना(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत सब्सिडी का लाभ लेने से पहले कंपनियों के बजाय बागवानों से जीएसटी काटा जा रहा है। बागवानी निदेशालय ने उपनिदेशकों को जीएसटी काटने के अजीबोगरीब फरमान जारी किए हैं। ऐसे में कहने को तो ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई के लिए सरकार 80 फीसदी उपदान दे रही है, लेकिन वास्तव में यह 68 प्रतिशत मिल रहा है। बागवानी विभाग ने ऑडिट की आपत्ति के बाद यह फैसला अपने स्तर पर लिया है, जबकि सीएम जयराम ठाकुर के बजट भाषण में 80 फीसदी सब्सिडी देने की घोषणा की थी। राज्य में सिंचाई जल के किफायती इस्तेमाल के लिए टपक और फव्वारा सिंचाई प्रणाली पर मुख्यमंत्री ने 80 फीसदी सब्सिडी देने की घोषणा की थी। इसे लगाने के लिए कई कंपनियों को सूचीबद्ध किया गया है। यही कंपनियां इस प्रणाली को लगाने के लिए सामग्री भी उपलब्ध करवाती है, लेकिन इस सामग्री पर जीएसटी इन कंपनियों की ओर से नहीं दिया जा रहा है, बल्कि किसानों-बागवानों से ही काटा जा रहा है। 

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लाभार्थी से पहले 24,364 रुपये लिए, अब 14,593 रुपये और मांग रहे 
जिला शिमला के चौपाल तहसील के निवासी रोशन लाल ने ड्रिप इरिगेशन प्रणाली लगाने के लिए राज्य बागवानी विभाग के समक्ष एक आवेदन किया। इसमें एक हेक्टेयर क्षेत्र में 1,21,608.48 रुपये की अनुमानित लागत थी। गाइडलाइंस के अनुसार 1,21,556 रुपये की लागत आ रही है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 66,855 रुपये और राज्य सरकार की ओर से 30,389 रुपये दिए जाएंगे। इसमें किसान का शेयर 24,311 रुपये होगा। इस बारे में 25 मार्च को जारी चिट्ठी के अनुसार रोशन लाल की ओर से 24,364 रुपये जमा किए गए, लेकिन सोमवार को 14,593 रुपये के जीएसटी की भी मांग की गई। 
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भाजपा किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष से नहीं मिले निदेशक, समय लेने को कहा  
भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष नरेश चौहान ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस मसले पर सोमवार को उद्यान निदेशक डॉ. आरके प्रुथी से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने मिलने से इंकार किया। निदेशक ने बताया कि वह बैठक में थे। अगर मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष समय लेकर आएं तो उनसे जरूर मिलेंगे। 
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लेखा परीक्षा की आपत्ति के बाद ऐसा कर रहे, सरकार से उठाएंगे मामला 
यह सही है कि ड्रिप इरिगेशन की सामग्री पर जीएसटी बागवानों से ही लिया जा रहा है, लेकिन ऐसा ऑडिट की आपत्ति के बाद किया जा रहा है। लेखा परीक्षा विभाग ने किसानों से ही जीएसटी लेने को कहा है। तभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। इस मामले को सरकार के समक्ष उठाया जा रहा है कि किसानों से जीएसटी कटवाने के बजाय कोई अन्य समाधान सुझाया जाए। - डॉ. आरके प्रुथी, निदेशक, उद्यान विभाग, हिमाचल प्रदेश। 

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