फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal in the grip of drought: Water level of 550 drinking water schemes dropped, 60 percent agriculture sector affected

सूखे की चपेट में हिमाचल: 550 पेयजल योजनाओं का जलस्तर गिरा, 60 फीसदी कृषि क्षेत्र प्रभावित

Fri, 29 Apr 2022 10:21 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 29 Apr 2022 10:21 AM IST
सार

जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि कृषि-बागवानी क्षेत्र पर भी सूखे की भारी मार पड़ी है। सेब बहुल क्षेत्र में 7,000 फीट तक के ऊंचाई वाले बगीचों में इसका असर देखने को मिल रहा है। बारिश नहीं हुई तो 8,000 फीट तक की ऊंचाई वाले सेब बगीचों पर भी सूखे की मार पड़ सकती है। 

विज्ञापन
Himachal in the grip of drought: Water level of 550 drinking water schemes dropped, 60 percent agriculture sector affected
हिमाचल प्रदेश सूखे की चपेट में(सांकेतिक)

विस्तार

समय पर बारिश न होने से हिमाचल प्रदेश सूखे की चपेट में आ गया है। अब तक प्रदेश की 550 पेयजल योजनाओं का जल स्तर गिर चुका है। इससे प्रदेश के कई इलाकों में पेयजल की किल्लत हो गई है। प्रदेश में कुल 9800 पेयजल योजनाएं हैं। राजस्व एवं जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने इसे लेकर सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी है। एक मई को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर विभिन्न विभागों के साथ समीक्षा बैठक भी करेंगे। इसके बाद सरकार इस मामले को केंद्र सरकार से उठाकर राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग करेगी। 

विज्ञापन


जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि कृषि-बागवानी क्षेत्र पर भी सूखे की भारी मार पड़ी है। सेब बहुल क्षेत्र में 7,000 फीट तक के ऊंचाई वाले बगीचों में इसका असर देखने को मिल रहा है। बारिश नहीं हुई तो 8,000 फीट तक की ऊंचाई वाले सेब बगीचों पर भी सूखे की मार पड़ सकती है। इससे फलों का आकार छोटा रह जाएगा। सूखे से कृषि क्षेत्र भी 60 फीसदी तक प्रभावित हुआ है। गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। किसानों को उनकी मेहनत के मुताबिक फसल हासिल नहीं हुई। इस बार गेहूं का दाना पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया।
विज्ञापन


मंत्री ने कहा कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों में हैंडपंप लगाने के लिए स्थान चिह्नित करने का निर्णय लिया गया है। विभाग के विशेषज्ञ ऐसे स्थानों को चयनित करेंगे, जहां हैंडपंप लगाए जा सकें, ताकि लोगों को पेयजल की किल्लत से राहत मिल सके। कोशिश रहेगी कि पेयजल टैंकरों के बजाय पेयजल योजनाओं से ही लोगों को पेयजल उपलब्ध करवाया जाए। उन्होंने कहा कि वीरवार को भी अधिकारियों से बैठक करके सूखे की स्थिति का जायजा लिया गया है। केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश को सूखाग्रस्त राज्य घोषित करके उचित मदद उपलब्ध करवाने का आग्रह किया जाएगा। साथ ही केंद्रीय दल से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने का भी आग्रह किया जाएगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 
मार्च-अप्रैल में सामान्य से 93 फीसदी कम बरसे बादल
प्रदेश में एक मार्च से 28 अप्रैल तक सामान्य से 93 फीसदी कम बारिश हुई। इस अवधि के दौरान 172.2 मिलीमीटर बारिश को सामान्य माना गया है, जबकि प्रदेश में इस वर्ष मात्र 12.4 मिलीमीटर बारिश ही हुई। बिलासपुर में सामान्य से 95, चंबा में 94, हमीरपुर में 92, किन्नौर में 91, कुल्लू में 84, कांगड़ा में 92, लाहौल-स्पीति में 94, मंडी में 83, शिमला में 94, सिरमौर में 99, सोलन में 95 और ऊना में 96 फीसदी कम बारिश हुई। उधर, प्रदेश में एक से 28 अप्रैल तक सामान्य से 89 फीसदी कम बारिश हुई।


लाहौल-स्पीति में नहीं हुई बर्फबारी
जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में इस बार बर्फ बारी नहीं हुई है। इसके चलते जिला में फसल की बिजाई में दिक्कतें पेश आई हैं। प्रदेश के जंगलों में लगातार आगजनी की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed