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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   30 percent apples of horticulturists will have to be rented in private CA store, many decisions taken in high

Himachal: निजी सीए स्टोर में किराये पर रखना होगा बागवानों का 30 फीसदी सेब, उच्चस्तरीय बैठक में लिए कई फैसले

Thu, 04 Aug 2022 09:57 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 04 Aug 2022 09:57 PM IST
सार

 कंपनियां सीए स्टोर में रखने के लिए जो सेब खरीदेंगी, उसके दाम कमेटी तय करेगी।  मुख्य सचिव आरडी धीमान की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई बैठक में इस कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी का अध्यक्ष डॉ. यशवंत सिंह परमार विश्वविद्यालय (विवि) नौणी के कुलपति को बनाया गया है।  

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30 percent apples of horticulturists will have to be rented in private CA store, many decisions taken in high
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में निजी कंपनियों के संचालित वातानुकूलित (सीए) स्टोरों में बागवानों का 30 फीसदी सेब किराये पर रखना ही होगा। इसके अलावा कंपनियां सीए स्टोर में रखने के लिए जो सेब खरीदेंगी, उसके दाम कमेटी तय करेगी। मुख्य सचिव आरडी धीमान की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई बैठक में इस कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटीका अध्यक्ष डॉ. यशवंत सिंह परमार विश्वविद्यालय (विवि) नौणी के कुलपति को बनाया गया है।  कमेटी में संबंधित क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान भी शामिल किए गए हैं। इससे सेब के दाम तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। कमेटी सीए स्टोर कंपनियों की सेब खरीद पर नजर रखेगी।

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बैठक में तय हुआ कि प्रदेश में सभी निजी सीए स्टोरों में बागवानों के सेब रखने के प्रावधान को समझौता ज्ञापन के अनुसार सख्ती से लागू करना होगा। अगर सीए स्टोर संचालक ऐसा नहीं करेंगे तो उन पर उद्यान विभाग कार्रवाई करेगा। बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि प्रदेश में सभी बागवानों को 1 अप्रैल 2022 के बाद एचपीएमसी या खुले बाजार से सेब कार्टन एवं ट्रे खरीद पर उन्हें जीएसटी का छह प्रतिशत उपदान सीधा उनके खातों में 15 दिन के अंदर जमा किया जाएगा। 
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बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी नहीं आए
एपीएमसी शिमला के अध्यक्ष नरेश शर्मा और भाजपा नेता चेतन बरागटा ने बताया कि इस बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा को भी बुलाया गया, लेकिन इसके पदाधिकारी नहीं आए। इससे जाहिर होता है कि मोर्चा को बागवानों के हितों की चिंता नहीं है। 

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