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सरकारी संस्थानों को भी सस्ती बिजली

Sat, 14 Jun 2014 05:33 AM IST
Shimla
Shimla Updated Sat, 14 Jun 2014 05:33 AM IST
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी, अर्द्ध सरकारी संस्थानों के लिए भी अच्छी सूचना है। उद्योगों और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की तर्ज पर राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सरकारी, अर्द्ध सरकारी संस्थानों की भी बिजली दरों में 20 और 30 पैसे प्रति यूनिट की कटौती की है। इससे प्रदेश के लगभग 50 हजार से अधिक छोटे-बड़े संस्थानों को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।
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20 किलोवाट लोड वाले संस्थानों की बिजली दरों में 30 पैसे प्रति यूनिट की कटौती की है जबकि 20 किलोवाट से अधिक लोड लेने वाले संस्थानों की बिजली दरें 20 पैसे प्रति यूनिट कम की हैं। इससे सरकारी, अर्द्ध सरकारी, शैक्षणिक संस्थान, खेल भवन या स्टेडियम, हॉस्टल, महिला मंडल, पंचायत भवन, धार्मिक स्थल और धर्मशालाओं पर यह दरें लागू की जाएंगी।
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लोड पुरानी दरें नई दरें
20 किलोवाट तक 5 रुपये 4.70 रुपये
20 किलोवाट से अधिक 4.60 रुपये 4.40 रुपये
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पुराना घाटा नए उपभोक्ताओं पर नहीं थोपा
शिमला। राज्य विद्युत बोर्ड लगभग 1800 करोड़ रुपये के घाटे में चल रहा है। इस घाटे को पूरा करने के लिए राज्य विद्युत बोर्ड की ओर से टैैरिफ बढ़ाकर पूरा करने के लिए प्रस्ताव भेजा था, लेकिन विद्युत नियामक आयोग ने बोर्ड के प्रस्ताव को नहीं माना। राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन सुभाष नेगी का कहना है कि पुराने ऋण या घाटे को नए उपभोक्ताओं पर नहीं थोपा जा सकता है। बिजली टैरिफ के अनुसार नियमत: जो भी खर्चे बिजली बोर्ड के बनते हैं, उसे पूरा दिया गया है। किसी स्तर पर एक पाई की भी कटौती नहीं की गई है।
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पांच साल कैसे खर्चें बजट, दिया सुझाव
राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से दिया गया प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश में बिजली बोर्ड को अपने बजट को किस तरह खर्च करना होगा, इसका भी विद्युत नियामक आयोग की ओर से पूरा प्रस्ताव दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार बोर्ड को 2019 तक सबसे अधिक रकम बिजली खरीद पर खर्च करनी होगी। इसके बाद कर्मचारियों के वेतन पर बजट खर्च किया जाएगा।

प्रस्ताव के अनुसार 2014-15 में बिजली खरीद पर सबसे अधिक 64 फीसदी बजट खर्च करने का अनुमोदन किया गया है। कर्मचारियों के मद पर 29 प्रतिशत बजट देय होगा। बजट का सात प्रतिशत अंश ब्याज, अवमूल्यन या इक्विटी या अन्य पर खर्च किया जा सकता है। इसी प्रकार 2015 से 2019 तक बजट बिजली खरीद पर 61 प्रतिशत, कर्मचारियों पर 30 फीसदी और ब्याज, अवमूल्यन या इक्विटी या अन्य पर 9 प्रतिशत अंश खर्च करने का आदेश जारी किया गया है। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि अगर अनुमोदन के अनुसार बजट खर्च किया गया तो किसी स्तर पर बोर्ड को वित्तीय घाटे से जूझना नहीं पड़ेगा।
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