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जिस बात के लिए लड़े, फिर भी वही
Shimla
Updated Thu, 05 Jun 2014 05:32 AM IST
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शिमला। जिस बात के लिए घुमारवीं के कांग्रेस विधायक लड़ रहे थे, उनके सचिवालय स्थित कार्यालय में वही हो रहा है। सात कर्मचारी आते हैं। यहां कोई काम नहीं और शाम को चले जाते हैं। ऐसा करते हुए एक महीना होने लगा है। धर्माणी मुख्य संसदीय सचिव पद को फिजूलखर्ची से भी जोड़ रहे थे, पर यह उनके इस्तीफा देने के बाद उन्हीं के दफ्तर में भी नहीं रुक पाई है।
मुख्य संसदीय सचिव वन पद से राजेश धर्माणी के इस्तीफे का एक महीना होने लगा है और उनका कार्यालय सूना पड़ा हुआ है। यहां पर कर्मचारी बिना काम के ही दफ्तर आते हैं और छुट्टी होने पर घर जाते हैं। धर्माणी के साथ अटैच किए इन कर्मचारियों की संख्या सात है। इनमें से दो निजी सहायक, दो वरिष्ठ सहायक, दो कनिष्ठ सहायक और एक चपरासी हैं। धर्माणी के इस्तीफे पर निर्णय नहीं हुआ है। वह इस्तीफा देने के बाद दफ्तर गए ही नहीं। धर्माणी ने यह इस्तीफा 10 मई को दे दिया था। आज एक महीना होने लगा है। जहां धर्माणी के इस्तीफे पर स्थिति साफ नहीं हुई है, वहीं उनके साथ के कर्मचारियों को भी रोजाना उन्हीं के दफ्तर में देखा जा सकता है।
वहीं, राजेश धर्माणी ने कहा है कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि इस पद की अहमियत इसी बाद से पता लगती है कि यह पद कितना अहम है। इस्तीफे पर एक महीना होने पर विचार नहीं हो रहा है।
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मुख्य संसदीय सचिव वन पद से राजेश धर्माणी के इस्तीफे का एक महीना होने लगा है और उनका कार्यालय सूना पड़ा हुआ है। यहां पर कर्मचारी बिना काम के ही दफ्तर आते हैं और छुट्टी होने पर घर जाते हैं। धर्माणी के साथ अटैच किए इन कर्मचारियों की संख्या सात है। इनमें से दो निजी सहायक, दो वरिष्ठ सहायक, दो कनिष्ठ सहायक और एक चपरासी हैं। धर्माणी के इस्तीफे पर निर्णय नहीं हुआ है। वह इस्तीफा देने के बाद दफ्तर गए ही नहीं। धर्माणी ने यह इस्तीफा 10 मई को दे दिया था। आज एक महीना होने लगा है। जहां धर्माणी के इस्तीफे पर स्थिति साफ नहीं हुई है, वहीं उनके साथ के कर्मचारियों को भी रोजाना उन्हीं के दफ्तर में देखा जा सकता है।
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वहीं, राजेश धर्माणी ने कहा है कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि इस पद की अहमियत इसी बाद से पता लगती है कि यह पद कितना अहम है। इस्तीफे पर एक महीना होने पर विचार नहीं हो रहा है।
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