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आखिरकार रेगुलर मुख्य सचिव बने मित्रा
Shimla
Updated Sat, 24 May 2014 05:35 AM IST
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शिमला। कार्यवाहक मुख्य सचिव पी. मित्रा को विवादों के बीच सरकार ने रेगुलर कर दिया है। शुक्रवार को प्रधान सचिव कार्मिक की ओर से जारी आदेशों में सरकार ने बीमारी के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहे मुख्य सचिव सुदृप्तो राय को एडवाइजर लगा दिया। मुख्य सचिव बनने के बाद भी पी. मित्रा गृह, विजिलेंस और सहकारिता जैसे अहम विभाग अपने पास ही रखेंगे। ये भी एक संयोग है कि इन तीनों विभागों में इस समय एचपीसीए के केस डील हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पहले ही कहा था कि विजिलेंस में कोई केस होने के आरोप पी. मित्रा पर लगे थे, उसकी रिपोर्ट सरकार ने मांगी है। रिपोर्ट शुक्रवार को सरकार को मिली और इसमें विजिलेंस ने बताया है कि उनके खिलाफ कोई भी मामला नहीं है। इसके बाद पी. मित्रा को स्थायी रूप से मुख्य सचिव बना दिया गया। हालांकि, पहले भी प्रेसवार्ता कर पी. मित्रा का नाम लिए बगैर हमले कर चुके पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी ने विजिलेंस रिपोर्ट को झूठा बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि विजिलेंस के शिमला थाने में 21 मार्च 2011 को 7/2011 नंबर एफआईआर जिस रिकार्डिगिं के आधार पर दर्ज है, उसमें किन अफसरों की आवाज है और कौन दलाली मांग रहा है? इसी रिकॉर्डिगिं पर दो दलालों को गिरफ्तार भी किया गया था। विजिलेंस के अफसरोें को चाहिए कि वे उस रिकॉर्डिगिं को ध्यान से सुनें और सरकार को भी सुनाएं। रिकॉर्डिगिं के बारे में एफआईआर में भी विस्तृत जिक्र किया गया है। एफआईआर भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट की धारा 8 के तहत दर्ज है।
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पहले ही कहा था कि विजिलेंस में कोई केस होने के आरोप पी. मित्रा पर लगे थे, उसकी रिपोर्ट सरकार ने मांगी है। रिपोर्ट शुक्रवार को सरकार को मिली और इसमें विजिलेंस ने बताया है कि उनके खिलाफ कोई भी मामला नहीं है। इसके बाद पी. मित्रा को स्थायी रूप से मुख्य सचिव बना दिया गया। हालांकि, पहले भी प्रेसवार्ता कर पी. मित्रा का नाम लिए बगैर हमले कर चुके पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी ने विजिलेंस रिपोर्ट को झूठा बताया।
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उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि विजिलेंस के शिमला थाने में 21 मार्च 2011 को 7/2011 नंबर एफआईआर जिस रिकार्डिगिं के आधार पर दर्ज है, उसमें किन अफसरों की आवाज है और कौन दलाली मांग रहा है? इसी रिकॉर्डिगिं पर दो दलालों को गिरफ्तार भी किया गया था। विजिलेंस के अफसरोें को चाहिए कि वे उस रिकॉर्डिगिं को ध्यान से सुनें और सरकार को भी सुनाएं। रिकॉर्डिगिं के बारे में एफआईआर में भी विस्तृत जिक्र किया गया है। एफआईआर भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट की धारा 8 के तहत दर्ज है।
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