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राजधानी में सड़क हादसों पर खुली नींद
Shimla
Updated Mon, 18 Feb 2013 05:30 AM IST
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शिमला। राजधानी में हो रहे सड़क हादसों पर आखिरकार पुलिस की नींद खुली है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए चंडीगढ़ की तर्ज पर पुलिस को सड़क पर तैनात किया जाएगा। एक उचित दूरी पर जवानों की तैनाती होगी। पुलिस नशे में, मोबाइल सुनकर और तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने वालों पर नजर रखेगी। पुलिस के पास एल्कोहल सेंसर और स्पीड रडार भी होंगे। चालक की गतिविधियों को मौके पर कैमरे में सबूत के तौर पर कैद किया जाएगा। यह व्यवस्था पखवाड़े भर में शुरू करने की तैयारी है। शहर सहित इस व्यवस्था को सुन्नी, जुन्गा, धामी, घणाहट्टी, हीरानगर, मशोबारा बल्देहां, नालदेहरा और बसंतपुर में भी लागू किया जाएगा।
2011 और 2012 में जिला शिमला में 63 घरों के चिराग सड़क हादसे में बुझ गए। 147 लोग घायल भी हुए। घायलों में से भी कइयों को जीवन भर के लिए अपंगता का दंश झेलना पड़ रहा है। तेज रफ्तार और नशे के सुरूर में गाड़ी चलाना हादसे की सबसे बड़ी वजह मानी जाती रही है। लेकिन अब मोबाइल सुनते हुए गाड़ी चलाना भी बड़ा कारण बनकर सामने आ रहा है। तीखे और तंग मोड़ पर सड़क के किनारे पैराफिट न होने की वजह से गाड़ी सीधी खाई में जा लुढ़कती है। पुलिस महकमे का मानना है कि पुलिस की उपस्थिति शहर के बाहर भी मुख्य सड़कों पर जरूरी है। ग्रामीण हल्कों में कई किलोमीटर तक पुलिस कहीं नहीं दिखती। दो से तीन किलोमीटर के बीच अगर इन जगहों पर पुलिस चौबीस घंटे नजर आए तो अपराध पर तो अंकुश लगेगा ही, सड़क हादसों में भी कमी आएगी।
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दुर्घटनाओं का ग्राफ लाएंगे नीचे : डीएसपी
डीएसपी सिटी पंकज शर्मा ने बताया कि सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी से अपराध पर अकुंश लगने के साथ साथ सड़क हादसों में कमी आएगी। इस दिशा में वह कार्य करेंगे। दुर्घटनाओं का ग्राफ नीचे लाएंगे।
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2011 और 2012 में जिला शिमला में 63 घरों के चिराग सड़क हादसे में बुझ गए। 147 लोग घायल भी हुए। घायलों में से भी कइयों को जीवन भर के लिए अपंगता का दंश झेलना पड़ रहा है। तेज रफ्तार और नशे के सुरूर में गाड़ी चलाना हादसे की सबसे बड़ी वजह मानी जाती रही है। लेकिन अब मोबाइल सुनते हुए गाड़ी चलाना भी बड़ा कारण बनकर सामने आ रहा है। तीखे और तंग मोड़ पर सड़क के किनारे पैराफिट न होने की वजह से गाड़ी सीधी खाई में जा लुढ़कती है। पुलिस महकमे का मानना है कि पुलिस की उपस्थिति शहर के बाहर भी मुख्य सड़कों पर जरूरी है। ग्रामीण हल्कों में कई किलोमीटर तक पुलिस कहीं नहीं दिखती। दो से तीन किलोमीटर के बीच अगर इन जगहों पर पुलिस चौबीस घंटे नजर आए तो अपराध पर तो अंकुश लगेगा ही, सड़क हादसों में भी कमी आएगी।
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दुर्घटनाओं का ग्राफ लाएंगे नीचे : डीएसपी
डीएसपी सिटी पंकज शर्मा ने बताया कि सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी से अपराध पर अकुंश लगने के साथ साथ सड़क हादसों में कमी आएगी। इस दिशा में वह कार्य करेंगे। दुर्घटनाओं का ग्राफ नीचे लाएंगे।
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