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एसयूसी में स्वीकृत दो नक्शों में खामियां
Shimla
Updated Thu, 31 Jan 2013 05:30 AM IST
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शिमला। भाजपा सरकार के कार्यकाल में 18 दिसंबर 2012 को हुई नगर निगम की सिंगल अंब्रेला कमेटी (एसयूसी) की अंतिम बैठक में दो नक्शे नियमों को ताक पर रखकर स्वीकृत किए गए हैं। कमेटी द्वारा स्वीकृत नक्शों की जांच नगर निगम ने पूरी कर रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है। रिपोर्ट में स्वीकृत नक्शों की जांच को गठित टीसीपी की कमेटी पर भी सवालिया निशान लगाए गए हैं। इसके अलावा नवंबर 2012 में हुई सिंगल अंब्रेला कमेटी के कुछ फैसलों को भी संदेहास्पद बताया गया है। निगम आयुक्त अमरजीत सिंह का कहना है कि मुख्य सचिव को उन्होंने जांच रिपोर्ट भेज दी है। आगामी निर्णय राज्य सरकार लेगी।
शहर के कोर और ग्रीन एरिया में मानकों को धता बताकर चार से छह मंजिला भवनों के पुनर्निर्माण की अनुमति देने का आरोप लगने पर सरकार ने कमेटी के फैसलों की जांच का जिम्मा आयुक्त को सौंपा था। निगम आयुक्त ने जांच करते हुए विशेषज्ञों की राय लेकर विस्तार से नक्शों का रिकार्ड खंगाला। जांच के दौरान दो नक्शों में खामी पाई गई है। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा 28 फरवरी 2011 को सिंगल अंब्रेला कमेटी के फैसलों की निगरानी के लिए गठित की गई टीसीपी विभाग की कमेटी पर भी सवाल उठाए गए हैं। 10-4-16 सेक्शन के तहत स्टेट टाउन प्लानर (मुख्यालय) को कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। कमेटी में तहसीलदार टीसीपी और प्लानिंग आफिसर सदस्य बनाए गए हैं। कमेटी को एसयूसी के फैसलों की समय-समय पर जांच कर जानकारी नगर निगम से बांटने का काम सौंपा गया है। लेकिन, यह कमेटी सिर्फ फाइलों तक ही रह गई है। यही एक बड़ा कारण माना जा रहा है कि 18 दिसंबर 2012 को हुई बैठक के फैसलों पर इस तरह से सवाल उठे।
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शहर के कोर और ग्रीन एरिया में मानकों को धता बताकर चार से छह मंजिला भवनों के पुनर्निर्माण की अनुमति देने का आरोप लगने पर सरकार ने कमेटी के फैसलों की जांच का जिम्मा आयुक्त को सौंपा था। निगम आयुक्त ने जांच करते हुए विशेषज्ञों की राय लेकर विस्तार से नक्शों का रिकार्ड खंगाला। जांच के दौरान दो नक्शों में खामी पाई गई है। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा 28 फरवरी 2011 को सिंगल अंब्रेला कमेटी के फैसलों की निगरानी के लिए गठित की गई टीसीपी विभाग की कमेटी पर भी सवाल उठाए गए हैं। 10-4-16 सेक्शन के तहत स्टेट टाउन प्लानर (मुख्यालय) को कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। कमेटी में तहसीलदार टीसीपी और प्लानिंग आफिसर सदस्य बनाए गए हैं। कमेटी को एसयूसी के फैसलों की समय-समय पर जांच कर जानकारी नगर निगम से बांटने का काम सौंपा गया है। लेकिन, यह कमेटी सिर्फ फाइलों तक ही रह गई है। यही एक बड़ा कारण माना जा रहा है कि 18 दिसंबर 2012 को हुई बैठक के फैसलों पर इस तरह से सवाल उठे।
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