आजीविका के लिए महिलाएं बना रहीं पुरुषों के क्षेत्र में पहचान, टैक्सी की मदद से हुईं आत्मनिर्भर
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आमतौर पर सड़कों पर हम पुरुष ड्राइवर को ही टैक्सी या बस चलाते देखते हैं। लेकिन अब महिलाओं ने पुरुषों के इस क्षेत्र में भी अपना अधिकार जमाना शुरु कर दिया है। धीरे-धीरे ही सही महिलाएं अब टू व्हीलर और कार के साथ बस तक ड्राइव कर रही हैं। कैब चलाकर अपनी आजीविका का साधन जुटा रहीं इन महिलाओं की संख्या अच्छी खासी है।
दिल्ली का आजाद फाउंडेशन इस काम में महिलाओं की मदद करता है। ये संस्था महिलाओं को गाड़ी चलाने की ट्रेनिंग देता है। जिसमे अबतक बहुत सारी महिलाएं कैब ड्राईवर के रूप में काम कर रही हैं। शन्नो बेगम सिंगल मदर हैं और बच्चे की शिक्षा के लिए खाना पकाने वाली के तौर पर काम करती थीं। लेकिन इस काम में आमदनी का कोई ठिकाना नहीं था। लेकिन संस्था के माध्यम से उन्होंने छह महीने का कोर्स किया। जिसके बाद उन्हें एक फिक्स आमदनी का जरिया मिल गया।
दिल्ली में कैब चला रहीं शन्नो का कहना है कि कम पढ़े-लिखे होने की वजह से उन्हें केवल घरों में काम या खाना पकाने का ही काम मिल सकता था। लेकिन एक कैब ड्राईवर बनकर अब उन्हें सम्मान मिलता है। और वो इससे काफी गर्व महसूस करती हैं। कैब कंपनी ओला और उबर में अब तक बहुत सारी महिलाओं को रोजगार दे चुका है। उबर के मुताबिक भारत में अबतक 200 एक्टिव कमर्शियली लाइसेंस महिला ड्राइवर हैं। जो कि काफी कम हैं। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही ये संख्या बढ़कर 500 से ज्यादा हो जाएगी।

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