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Women’s Equality Day: ओड़िसी नृत्य कला को सशक्त भावों में सहेजने वाली सुजाता मोहपात्रा के बारे में जानें

Fri, 26 Aug 2022 04:01 AM IST
स्वाति शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वाति शर्मा Updated Fri, 26 Aug 2022 04:01 AM IST
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Women’s Equality Day: Sujata Mohapatra a life dedicated to Odissi dance
सुजाता मोहपात्रा - फोटो : Google

भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी हो या सूर्य की चमत्कृत करती शक्ति और ऊर्जा को सहेजे कोणार्क का सूर्य मंदिर, हर जगह आपको पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियां भावपूर्ण मुद्राओं से सजी नजर आएँगी। हमारी संस्कृति, हमारी कला और हमारी परंपराओं को सहेजे रखने का यह तरीका बहुत प्राचीन है और इसी का अधिक जीवंत रूप है हमारी शास्त्रीय और लोक कलाएं भी। चाहे संगीत हो या नृत्य, हर कला भावों की अभिव्यक्ति करती है। यह एक साधना है जो वर्षों की मेहनत और लगन के बाद पूर्णता पाती है। ऐसी कला को पूजने वाले कलाकार फिर सबके लिए प्रेरणा बन जाते हैं। ओड़िसी शास्त्रीय नृत्य की गुरु सुजाता मोहपात्रा एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने इस कला को मन में आत्मसात किया है। इस नृत्य कला में पारंगत सुजाता मोहपात्रा आज न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी भारतीय कला के इस रूप को गौरव के साथ प्रस्तुत कर रही हैं। देश-विदेश में अपनी प्रस्तुतियों के लिए सम्मान और पुरस्कार पा चुकीं सुजाता जी उतनी ही निष्ठा से अगली पीढ़ी में ओड़िसी नृत्य के पौधे रोप रही हैं। 

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Women’s Equality Day: Sujata Mohapatra a life dedicated to Odissi dance
कोणार्क सूर्य मंदिर का दृश्य - फोटो : Youtube

4 साल की उम्र में प्रारम्भ हुआ प्रशिक्षण 

कला की साधना के लिए एक जीवन कम होता है। यह बात सुजाता पर पूरी तरह खरी उतरती है। यही वजह रही होगी कि उन्होंने मात्र 4 वर्ष की उम्र में कला के प्रति अपना रुझान स्पष्ट कर दिया था। इसके अलावा एक और चीज थी जिसने उन्हें प्रेरित किया और वह थी उनके घर का कला के समर्पित माहौल। उनकी माँ स्वयं एक ओड़िसी नृत्यांगना रहीं और उन्होंने शास्त्रीय ओड़िसी नृत्य को पूरे विश्व में पहचान दिलाने वाले कलागुरु, प्रख्यात ओड़िसी नृत्य कलाकार, पदम् विभूषण स्वर्गीय केलुचरण मोहपात्रा से इसकी शिक्षा प्राप्त की थी।

यह एक संजोग ही रहा कि सुजाता ने भी बाद में न केवल स्वर्गीय केलुचरण मोहपात्रा जी से करीब 20 वर्षों तक नृत्य की बारीकियां सीखीं बल्कि वे उनकी पुत्रवधु भी बनीं। अपने गुरु और परिवार की इस परम्परा को आगे बढ़ाते हुए आज सुजाता, गुरु केलुचरण मोहापात्रा जी द्वारा स्थापित ओड़िसी नृत्य प्रशिक्षण संस्थान 'सृजन' में प्रिंसिपल के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 
 
मंदिर की नृत्य परंम्परा

ओड़िसी नृत्य मुख्यतः मंदिर में किये जाने वाले नृत्य की महारी परम्परा को प्रस्तुत करता है। यही कारण है कि विभिन्न धार्मिक कथाओं और गाथाओं का चित्रण इस नृत्य के जरिये किया जाता है। इस महारी परम्परा में भक्ति भाव और रति भाव दोनों का ही प्रस्तुतिकरण होता है। प्रभु के प्रति समर्पण और भौतिकता से परे, बिना किसी शर्त के किये जाने वाले प्रेम की अभिव्यक्ति, दोनों ही प्रकार के भाव इस नृत्यशैली की विशेषता हैं। सुजाता जी अपने भावप्रवण नृत्य से इन प्रसंगों को मंच पर जीवंत बनाने में दक्ष हैं। विशेषकर श्री कृष्ण व उनके जीवन प्रसंगों को खूबसूरती से उकेरने में उनका कोई सानी नहीं।

अपने गुरुजनों से शिक्षा को सुजाता जी ने इस प्रकार आत्मसात किया है कि वे ओड़िसी नृत्य विद्या में गुरु केलुचरण मोहपात्रा की तकनीक और उनकी विशिष्ट भाव प्रस्तुतियों को मंच पर उन्ही की तरह दर्शा पाती हैं। यही कारण है कि राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आज उनके नृत्य के सभी कायल हैं। अपनी प्रस्तुतियों व कला के प्रति समर्पण के लिए सुजाता जी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (भारत सरकार-2017), पंडित जसराज सम्मान, संजुक्ता पाणिग्रही सम्मान, महारी सम्मान आदि से सम्मानित किया गया है। 

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Women’s Equality Day: Sujata Mohapatra a life dedicated to Odissi dance
श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों की प्रस्तुति - फोटो : Istock

लक्ष्य पर हो नजर तो बाधाओं से क्या डर 

एक प्रशिक्षण संस्थान की प्रिंसिपल, गुरु व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कलाकार के रूप में सुजाता जीवन की हर भूमिका को सहजता के साथ निभाने में विश्वास करती हैं। वह मानती हैं कि यदि आपने लक्ष्य तय कर लिया है तो फिर राह में आने वाली बाधाओं से न डरें। बाधाएं जीवन का हिस्सा हैं इनसे डर कर कदम पीछे न लें। अपनी प्राथमिकताएं तय करते जाएँ और लक्ष्य की ओर बढ़ते जाएँ। सुजाता के अनुसार कला के लिए पूर्ण समर्पण आपको निरंतर सीखने और सुधार करने में मदद करता है। इसके लिए नियमित अभ्यास ही एकमात्र मार्ग है।

नृत्य के अतिरिक्त साहित्य और योग भी सुजाता जी को जीवन में सकारात्मक बनाये रखने में सहायता करता है। वे मानती हैं कि उन्हें गुरू केलुचरण मोहपात्रा के रूप में मार्गदर्शक का मिलना एक आशीर्वाद है और यदि वे अपने प्रयासों से गुरूजी के नृत्य जीवन का एक अंश भी साकार कर पाएंगी तो यह उनके प्रशिक्षण को सार्थक बना देगा।
 

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