Women’s Equality Day भारत की पहली महिला फोटोजर्नलिस्ट होमाई व्यारावाला हैं महिला समानता की मिसाल
आज पूरी दुनिया में अपनी बेहतरीन तस्वीरों के लिए नाम अमर कर गईं होमाई के लिए फोटोग्राफी पहला प्यार नहीं था। वह तो डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थीं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तस्वीरें, कितना कुछ कह जाती हैं। पूरी की पूरी कहानी जैसे रंगों में या कभी ब्लैक एन्ड व्हाइट ढलकर सामने आ जाती है। कैमरे और फोटोग्राफी का शौक आजकल लगभग हर एक को होता है । कौन सा प्रोफ़ाइल अच्छा होगा, कैसी रौशनी होगी तो फोटो ज्यादा अच्छा आएगा, जैसे सवाल लोग इंटरनेट पर भी ढूंढ लेते हैं। यहाँ तक कि लगभग हर मोबाइल फोन में अब शानदार मेगा पिक्सल्स वाला कैमरा होता है, लेकिन जरा सोचिये उस समय के बारे में जब भारी भरकम कैमरों के सिर्फ ब्लैक एन्ड व्हाइट तस्वीरें खींची जाती थीं। सोचकर ही रोमांच सा होता है कि उस समय के फोटोजर्नलिस्ट काम कैसे करते होंगे क्योंकि उन्हें तो घटनाओं, दुर्घटनाओं को कैमरे में उतारने के लिए बड़ी मशक्क्त करनी होती होगी, और अगर वह फोटोजर्नलिस्ट कोई महिला हुई तो?
यह सारे सवाल उन तमाम लोगों के जेहन में ज्यादा कौंधते होंगे जिन्होंने उस जमाने में होमाई व्यारावाला को फोटोग्राफी करते देखा होगा। भारत की पहली महिला फोटोजर्नलिस्ट, पदम विभूषण, होमाई व्यारावाला के लिए भी यह आसान तो कतई नहीं रहा होगा। 1900 के दशक की शुरुआत के साल, जब औरतों के लिए कई तरह की पाबंदियां कपड़ों के हर रेशे के साथ उनके शरीर से चिपकी रहती होंगी, होमाई ने यह करियर चुनने की हिम्मत दिखाई जो बाकी लड़कियों के लिए तो असंभव ही रहा होगा।
पहला प्रेम नहीं था फोटोग्राफी
आज पूरी दुनिया में अपनी बेहतरीन तस्वीरों के लिए नाम अमर कर गईं होमाई के लिए फोटोग्राफी पहला प्यार नहीं था। वह तो डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थीं लेकिन एक डॉक्टर के प्रोफेशन में न खाने का ठिकाना, न सोने का। तो इस अंतहीन काम के समय को समझते हुए उनकी माँ ने उन्हें इसके लिए मना कर दिया। उस समय उनकी माँ को भी यह मालूम नहीं होगा कि होमाई आगे जिस करियर को अपनायेंगी उसमें तो वर्किंग आवर्स का और भी कोई ठिकाना नहीं होगा। लेकिन यह शायद होमाई के भीतर कुछ अलग कर गुजरने की इच्छा ही थी जो उन्हें इस प्रोफेशन में ले आई और उन्होंने साबित कर दिखाया कि कठिन या असम्भव कुछ नहीं है, बस आपके भीतर कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए।
लाइफ, कैमरा और एक्शन
ये तब हुआ जब जे जे स्कूल ऑफ़ आर्ट के अपने कॉलेज के दिनों में होमाई की मुलाक़ात मानेकशॉ व्यारावाला से हुई। मानेकशॉ एक फ्रीलांस फोटोग्राफर थे और प्रोफेशनल फोटोग्राफी की दुनिया से होमाई का परिचय करवाने वाले पहले व्यक्ति भी वही बने और फिर बाद में उनके पति भी। शुरुआत में होमाई ने अपने दोस्तों और क्लासमेट्स की तस्वीरें खींची जिन्हें पसंद किया गया लेकिन रास्ता इतना आसान भी नहीं था। उनकी खींची तस्वीरें पहले पहल उनके पति के नाम से छपीं और उसके बाद में उनके छद्म नाम से क्योंकि एक औरत के फोटोग्राफर होने की बात को पचाना लोगों के लिए आसान नहीं था।
दुखद यह है कि उसी दौर में विदेशों में औरतें बकायदा प्रोफेशनल फोटोग्राफी भी कर रही थीं और फोटोजर्नलिज्म भी। किसी भी इवेंट में लोग होमाई की उपस्थिति को ज्यादा तवज्जो नहीं देते थे और ये होमाई के लिए अच्छा ही साबित हुआ। क्योंकि इससे उन्हें आसानी से कहीं भी पहुंचकर अपना काम करने की स्वतन्त्रता मिल जाती थी। कोई उनको टोकता भी नहीं था और उन पर ध्यान भी नहीं देता था।
नेहरू जी और बदलता भारत
धीरे धीरे होमाई की खींची तस्वीरों ने लोगों का ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया। साड़ी में साइकल चलाती, पीठ पर कैमरा लादे भाग भाग कर इवेंट्स कवर करने वाली यह स्मार्ट और कुशल महिला लोगों की नजर में आने लगी। चुनौतियाँ तब भी कई थीं लेकिन होमाई सबको झाड़ झूड़कर आगे बढ़ती चलीं। नेहरू जी और नए नए स्वतंत्र हुए भारत की परिस्थितियां होमाई का पसंदीदा विषय रहे और इनको लेकर उनके द्वारा खींची गई तस्वीरें आज भी ऐतिहासिक दस्तावेजों के रूप में हमारी धरोहर हैं। इसके अलावा उन्होंने बड़ी संख्या में आज़ाद भारत के नेतृत्वकर्ताओं, देश-विदेश के राजनीतिज्ञ और अन्य प्रसिद्ध हस्तियों को भी अपने कैमरे में कैद किया।
जब भारत भी पैपरात्ज़ी कल्चर की चपेट में आने लगा तो होमाई ने अपने चार दशकों से अधिक के करियर को अलविदा कह दिया क्योंकि वे इस कल्चर का हिस्सा नहीं बनना चाहती थीं। 2012 में 92 वर्ष की उम्र में दुनिया को अपनी लाजवाब तस्वीरों की भेंट देकर होमाई हमेशा के लिए सो गईं। उनके खींचे फोटोग्राफ्स आज भी फोटोग्राफी के विद्यार्थियों सहित पूरे देश के लिए गौरव का विषय हैं।

कमेंट
कमेंट X