{"_id":"651927ab7427ccdcb80a82e0","slug":"women-power-salman-sultan-doordarshan-news-reader-life-story-in-hindi-2023-10-01","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Salma Sultan: साड़ी संस्कृति और शालीन की मिसाल, इंदिरा गांधी की हत्या की खबर पढ़ने वाली एंकर","category":{"title":"Shakti","title_hn":"शक्ति","slug":"shakti"}}
Salma Sultan: साड़ी संस्कृति और शालीन की मिसाल, इंदिरा गांधी की हत्या की खबर पढ़ने वाली एंकर
Sun, 25 Aug 2024 10:02 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिलाष श्रीवास्तव
Updated Sun, 25 Aug 2024 10:02 AM IST
विज्ञापन
सलमा सुल्तान न्यूज रीडर
- फोटो : Social media
टीवी न्यूज अब समय के साथ काफी ग्लैमरस हो गया है, एंकर्स काफी एडवांस और खबरें काफी मिर्च-मसाले वाली। हालांकि एक दौर था जब टीवी न्यूज पर साड़ी संस्कृति का एक छत्र राज था। सलमा सुल्तान का नाम कौन भूल सकता है? 23 साल की उम्र में पहली बार समाचार पढ़ने वाली सलमा सुल्तान सबसे कम उम्र की न्यूज रीडर्स में से एक थीं। उस दौर में समाचार पढ़ने वालों का मेच्योर दिखना जरूरी होता था, हालांकि सलमा सुल्तान को जब ये काम मिला तो उन्होंने बखूबी उसे निभाया और लोगों के दिल में जगह बना ली।
विज्ञापन
हालांकि सलमा जी का जीवन इतना आसान भी नहीं रहा, कुछ चीजें जैसे नियति ने निर्धारित कर रखी थीं। न्यूज रीडिंग भी ऐसे ही शुरू हुआ।
पहली बार स्क्रीन पर आने का मौका
एक इंटरव्यू में सलमा जी बताती हैं, दूरदर्शन में उस समय फीमेल न्यूज रीडर प्रतिमा पुरी और मेल रीडर गोपाल कौल हुआ करते थे। किसी कारणवश गोपाल जी समाचार नहीं पढ़ना चाह रहे थे, इस चक्कर में वो बाल मुंडवाकर आ गए। अब स्क्रीन पर उन्हें कैसे भेजा जाता, लिहाजा आनन-फानन में मुझे ये काम सौंपा गया। मुझसे जब पूछा गया क्या आप न्यूज पढ़ सकती हैं, मैंने तुरंत ‘हां’ कह दी।
विज्ञापन
उसके बाद समय के साथ सलमा सुल्तान लोगों की ऐसी पसंदीदा एंकर बनीं, जिन्हें लोग अब भी उनकी प्रस्तुति और सादगी के लिए याद करते हैं।
इंदिरा गांधी की हत्या की खबर
एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में सलमा जी बताती हैं,करियर में वैसे तो कई सारे समाचार पढ़े, लेकिन 31 अक्टूबर 1984 का दिन हमेशा याद रहेगा। उस दिन मैं अपनी ड्यूटी पर थी और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की खबर आ गई थी। दूरदर्शन के पास ये खबर थी लेकिन चैनल जब तक खबर की पुष्टि नहीं करता, तब तक इसे प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। ये खबर पढ़ने के लिए भी मुझे ही दिया गया। बहुत कुछ भावनात्मक था पर स्क्रीन पर जाकर आप अपनी भावनाओं को नहीं रखते, मैने उस दिन भी आम दिनों की तरह ही पढ़ी।
विज्ञापन

कमेंट
कमेंट X