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इस भारतीय महिला को कहा जाता है 'बांस की रानी', जानिए नमिता नामदेव की कहानी

Sun, 16 Mar 2025 09:57 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sun, 16 Mar 2025 09:57 AM IST
सार

नमिता पहले एक आम गृहिणी थीं, जो बच्चों को संभालती थी और खेत के कामों में पति की मदद करती थी। मगर केवल खेती के कामों से उनके परिवार का गुजारा करना मुश्किल था, इसलिए वह कुछ करना चाहती थीं। 

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Who is namita namdev from tetwali maharashtra bamboo kandils success story in hindi
बैंबू प्लांट - फोटो : Instagram

विस्तार

महाराष्ट्र के टेटवाली नामक एक छोटे से गांव की रहने वाली नमिता नामदेव 'बांस की रानी' हैं। वह बांस से बहुत-सी खूबसूरत चीजें बनाती हैं, जैसे- कंदील (आसमानी लालटेन), फोन होल्डर, राखी, डस्टबिन, फोटो फ्रेम, खिलौने, हैंगर, की-चेन आदि। खास बात यह है कि उनके द्वारा बांस से बनाई गई चीजें न केवल भारत में, बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों सहित पूरी दुनिया में बिकती हैं। 

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नमिता पहले एक आम गृहिणी थीं, जो बच्चों को संभालती थी और खेत के कामों में पति की मदद करती थी। मगर केवल खेती के कामों से उनके परिवार का गुजारा करना मुश्किल था, इसलिए वह कुछ करना चाहती थीं। 
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कारीगरी का किया कोर्स

एक दिन उन्हें पता चला कि 'केशव सृष्टि' नामक एक गैर सरकारी संगठन गांव की महिलाओं को कारीगरी सिखा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। साथ ही कोर्स पूरा होने पर वह संगठन महिलाओं को स्थाई काम भी देगा।
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प्रशिक्षण के साथ पति की खेतों में की मदद

 बस फिर क्या था, नमिता ने अपने घर पर इस बारे में बात की, सास ने भी उनका पूरा साथ दिया, ताकि वह नया हुनर सीख सकें। नमिता औ उनकी ननद रोजाना प्रशिक्षण लेने जाने लगीं। प्रशिक्षण के साथ-साथ वह खेतों में पति की मदद भी करतीं।

नमिता को मिलने लगे ऑर्डर 

30 दिनों की प्रशिक्षण अवधि जब खत्म हुई तो नमिता को ऑर्डर मिलने लगे, लेकिन काफी कम। मगर उन्होंने प्रयास जारी रखा। परिणाम ये रहा कि दीपावली के मौके पर उन्हें तीन हजार से ज्यादा बांस की कंदीलें बनाने के ऑर्डर मिले। 


कई महिलाओं का नेतृत्व कर रहीं नमिता

आज नमिता कई महिलाओं का नेतृत्व करती हैं और उन्हें बांस से खूबसूरत चीजें बनाना सिखाती हैं तो उनसे भी कुछ न सीखती हैं। इस समय उनके साथ आस-पास के 23 गांवों की सात सौ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं, जो कि अपनी मेहनत से हर महीने नौ हजार रुपये तक कमा लेती हैं।

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