Aruna Asaf Ali: मिलिए अमेरिका में भारत के पहले राजदूत की पत्नी से, जिनका साहस बन गया सबके लिए प्रेरणा
जब महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू समेत कांग्रेस के सभी नेता गिरफ्तार हुए तो कांग्रेस के मुंबई अधिवेशन में अरुणा आसफ अली ने भाग लिया और अगले ही दिन गोवालिया टैंक मैदान (आजाद मैदान) में कांग्रेस का झंडा फहराया।
विस्तार
Aruna Asaf Ali Biography In Hindi: मौजूदा समय में महिलाएं हर क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं। उनकी भागीदारी अब घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं, बल्कि खेल, मनोरंजन, रक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य समेत हर क्षेत्र में बढ़ रही है। महिलाओं को शिक्षा और नौकरी के समान अवसर मिल रहे हैं जो उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, लेकिन आजादी से पहले जब अंग्रेजों से देश को स्वतंत्र कराने के लिए देशवासी संघर्षरत थे, तब भी महिलाओं की सहभागिता ने अहम भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम और भारत छोड़ो आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाली महिलाओं में से एक अरुणा आसफ अली हैं। आइए जानते हैं अरुणा आसफ अली की बहादुरी की कहानी।
कौन थीं अरुणा आसफ अली
अरुणा असफ अली शिक्षिका, राजनीतिक कार्यकर्ता और प्रकाशक थीं, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने मुंबई के गोवालिया मैदान में कांग्रेस का झंडा फहराया था। आजादी के बाद वह राजनीति में आईं और 1958 में दिल्ली की मेयर नियुक्त हुईं। उन्होंने एक मीडिया पब्लिशिंग हाउस की स्थापना भी की। उनका एक परिचय ये भी है कि अरुणा आसफ अली अमेरिका में भारत के प्रथम राजदूत की पत्नी थीं।
अरुणा आसफ अली का जीवन परिचय
अरुणा आसफ अली का जन्म 16 जुलाई 1909 को तात्कालिक पंजाब के कालका (वर्तमान हरियाणा) नाम के स्थान पर एक बंगाली परिवार में हुआ था। ब्राह्मण परिवार में जन्मी बच्ची का नाम अरुणा गांगुली रखा गया। अरुणा के पिता का होटल था।
अरुणा आसफ अली की शिक्षा
स्कूली पढ़ाई नैनीताल से पूरी करने के बाद अरुणा ने लाहौर से आगे की शिक्षा हासिल की। वह बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि और पढ़ाई में उच्च रहती थीं।
अरुणा आसफ का करियर
पढ़ाई पूरी करने के बाद अरुणा शिक्षिका बन गईं और कोलकाता के गोखले मेमोरियल काॅलेज में पढ़ाने लगीं। 1928 में अरुणा ने इलाहाबाद कांग्रेस पार्टी के नेता आसफ अली से प्रेम विवाह कर लिया। आसफ अली अरुणा से 21 वर्ष बड़े थे।
अरुणा का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
बाद में अरुणा ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया और 1930, 1932 और 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह के दौरान जेल गईं। 1942 में 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान जब महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू समेत कांग्रेस के सभी नेता गिरफ्तार हुए तो कांग्रेस के मुंबई अधिवेशन में अरुणा आसफ अली ने भाग लिया और अगले ही दिन गोवालिया टैंक मैदान (आजाद मैदान) में कांग्रेस का झंडा फहराया।
तीन साल तक भूमिगत रहते हुए उन्होंने आंदोलन जारी रखा। इस दौरान ब्रिटिश पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई तो उनकी संपत्ति जब्त कर बेच दी गई। अरुणा ने राम मनोहर लोहिया के साथ कांग्रेस की मासिक पत्रिका 'इंकलाब' का संपादन और ऊषा मेहता के साथ कांग्रेस के एक गुप्त रेडियो स्टेशन से प्रसारण करना शुरू किया। 29 जुलाई 1996 में 87 साल की अरुणा आसफ अली का निधन कोलकाता में हुआ था।
पुरस्कार
अरुणा आसफ अली अंतरराष्ट्रीय लेनिन पुरस्कार, 'ऑर्डर ऑफ़ लेनिन', जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार, पद्म विभूषण और मृत्यु उपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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