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Charlotte Chopin: कौन हैं चार्लोट चोपिन, जो बनीं वैश्विक स्तर पर बुजुर्गों के लिए मिसाल

Wed, 30 Apr 2025 02:47 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 30 Apr 2025 02:47 PM IST
सार

चार्लोट चोपिन ने उम्र की बाधाओं को पार करके प्रशंसनीय कार्य किया है, वह हर महिला और बुजुर्ग जनों के लिए मिसाल हैं।

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Who is 101 Year Old Charlotte Chopin Who Broke Age Barriers and Won Padma Shri Know full story in Hindi
चार्लोट चोपिन - फोटो : instagram

विस्तार

Charlotte Chopin: चार्लोट चोपिन एक फ्रांसीसी मूल की योग शिक्षिका हैं, जिन्होंने 101 वर्ष की आयु में भी अपने सक्रिय जीवन और उल्लेखनीय योगदान से लोगों को प्रेरित किया। वर्ष 2024 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया, जो देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। इसके पहले 10वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संबोधन में चार्लोट चोपिन की सराहना की थी। चार्लोट चोपिन ने उम्र की बाधाओं को पार करके प्रशंसनीय कार्य किया है, वह हर महिला और बुजुर्ग जनों के लिए मिसाल हैं।

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चार्लोट चोपिन का प्रारंभिक जीवन 

चार्लोट चोपन का जन्म 1922 में फ्रांस में हुआ था। बचपन से ही उन्हें नृत्य और शरीर को स्वस्थ बनाए रखने वाले अभ्यासों में गहरी रुचि थी। उन्होंने अपनी युवावस्था में बैले डांस और अन्य नृत्य शैलियों में प्रशिक्षण प्राप्त किया। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ उन्होंने योग की ओर रुझान बढ़ाया और इसे अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लिया।
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योग और स्वास्थ्य का संदेश

चार्लोट चोपिन ने 50 वर्ष की उम्र के बाद योग अभ्यास करना शुरू किया और फिर दूसरों को भी योग सिखाना शुरू किया। उन्होंने विशेष रूप से उच्च आयु के लोगों के लिए योग और बॉडी मूवमेंट पर केंद्रित शिक्षाएं दीं। उन्होंने यह सिद्ध किया कि योग और शरीर संचालन के अभ्यास केवल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि हर उम्र के व्यक्ति के लिए लाभकारी हो सकते हैं। फ्रांस समेत अन्य देशों में उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग की कक्षाएं चलाईं और उन्हें आत्मनिर्भर और सक्रिय जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित किया।


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प्रेरक योगदान और सम्मान

चार्लोट चोपन केवल एक योग ट्रेनर ही नहीं हैं, बल्कि समाज में उम्रदराज लोगों के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण की प्रतीक बन गईं है। 101 वर्ष की आयु में भी उनका सक्रिय जीवन, दैनिक योगाभ्यास और सजीवता ने पूरी दुनिया को प्रेरित किया। भारत सरकार ने इस प्रेरक जीवन और भारतीय योग पद्धति के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान के लिए 2024 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा। वह पद्मश्री पाने वाली सबसे उम्रदराज विदेशी नागरिकों में शामिल हैं।

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