गांव की पहली अफसर दीदी हैं ममता यादव, जानिए यूपीएससी में सफलता की कहानी
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लोग अपनी मेहनत और लगन से घर परिवार का नाम रोशन करते हैं। देश का प्रतिनिधित्व करते हैं लेकिन बहुत कम लोग होते हैं जो दूसरों की प्रेरणा और आदर्श बन जाते हैं। हम उन जैसा बनना तो चाहते हैं पर उसके लिए क्या करना पड़ेगा, कौन सी राह पर चलना पड़ेगा, ये पता नहीं होता। लेकिन हमारी प्रेरणा बनने वाले कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो खुद की मंजिल तलाशने के साथ दूसरों के लिए भी रास्ता बनाते हैं। ऐसे ही लोगों में एक नाम शामिल है आईएएस ममता यादव का। यूपीएससी परीक्षा 2020 में ऑल इंडिया में पांचवी रैंक हासिल की है। ममता की उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि वह जिस इलाके से आईं हैं, वहां से पहली बार कोई महिला आईएएस अधिकारी बनी है। उन्होंने अपने परिवार का तो मान बढ़ाया ही, साथ ही गांव की बाकी लड़कियों को सिविल सर्विसेज में जाने का मार्ग दिखाया। चलिए जानते हैं आईएएस ममता यादव के बारे में।
ममता यादव कौन हैं
ममता यादव ने इस साल संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में देश भर में पांचवी रैंक (एआईआर-5) हासिल की ममता यादव हरियाणा की रहने वाली हैं। 24 साल की ममता हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के एक छोटे से गांव बसई की निवासी हैं। जब उनका रिजल्ट आया तो ममता के पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ममता यादव के पिता का नाम अशोक यादव है, जो कि एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। वहीं ममता की मां का नाम सरोज देवी है और वह एक गृहणी हैं।
ममता यादव की शिक्षा
आईएएस ममता यादव ने अपनी पढ़ाई दिल्ली से पूरी की है। ममता पढ़ाई में काफी होशियार रही हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से टॉप किया था। उसके बाद ममता ने आईएएस अधिकारी बनने की दिशा में प्रयास शुरू किया और यूपीएससी की तैयारी करने लगीं। साल 2020 में ममता ने यूपीएससी की परीक्षा दी थी, उस समय उनकी रैंक 556 थी। जिसके बाद उनका सेलेक्शन तो हो गया था, लेकिन उनकी मंजिल दूर थी। परीक्षा में पास होने के बाद उन्हें भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा में ट्रेनिंग के लिए भेज दिया गया।
ममता यादव के नाम उपलब्धि
बाद में ममता ने अधिक पढ़ाई की और ऑल इंडिया लेवल पर यूपीएससी में पांचवी रैंक प्राप्त की। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए ममता यादव 10 से 12 घंटे पढ़ाई करती थीं। ममता की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अधिकतर सेल्फ स्टडी की। यूपीएससी से पहले ममता एसएससी की परीक्षा भी पास कर चुकी हैं। ममता यादव अपने गांव की पहली महिला हैं, जो सिविल सर्विसेज में शामिल हुईं हैं। यही वजह है कि उनके परिवार के साथ ही गांव का बच्चा-बच्चा उनके पास होने से खुश है।

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