Budget 2026: 9वीं बार बजट पेश करने वाली निर्मला सीतारमण क्यों हैं महिला सशक्तिकरण की पहचान?
Nirmala Sitharaman Budget 2026 : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार आम बजट पेश करने जा रही हैं। यहां वो 5 कारण बताए जा रहे हैं, जिन्होंने उन्हें महिला सशक्तिकरण की मिसाल बना दिया।
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Nirmala Sitharaman: आज निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार भारत का आम बजट पेश किया। यह महज एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं रह गई, बल्कि ऐतिहासिकक बन गई है। भारतीय राजनीति, जो दशकों तक पुरुष-प्रधान रही, वहां एक महिला का इतने लंबे समय तक सबसे ताकतवर आर्थिक कुर्सी पर बने रहना अपने आप में संदेश है। वह महिला सशक्तिकरण की जीवित मिसाल है। निर्मला सीतारमण महिला सशक्तिकरण की मिसाल इसलिए नहीं हैं क्योंकि वे महिला हैं, बल्कि इसलिए हैं क्योंकि उन्होंने सबसे मुश्किल जिम्मेदारी को सबसे लंबे समय तक निभाया और निभा रही हैं। आज जब वे 9वीं बार बजट पेश कर रही हैं, यह सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, मानसिकता में बदलाव का सबूत है।
सत्ता नहीं, दक्षता के दम पर शीर्ष तक पहुंच
निर्मला सीतारमण किसी राजनीतिक विरासत से नहीं आईं। न कोई गॉडफादर, न कोई पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि। उन्होंने मेहनत, वैचारिक स्पष्टता और विषय की गहरी समझ के दम पर अपनी जगह बनाई। यह उस हर महिला के लिए उदाहरण है जो योग्यता को अपना सबसे बड़ा हथियार मानती है।
देश की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री
वित्त मंत्रालय से पहले वे भारत की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री बनीं। 2017 में रक्षा मंत्री बनकर उन्होंने उस मंत्रालय की कमान संभाली, जिसे अब तक पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। सेना, रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कठोर माने जाने वाले विभाग में उन्होंने यह तोड़ा कि महिलाएं सिर्फ सॉफ्ट पोर्टफोलियो के लिए होती हैं। यह महिला नेतृत्व को लेकर बनी रूढ़ धारणाओं पर सीधा प्रहार था। सेना से जुड़े अहम फैसलों में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।
लगातार 9 बार केंद्रीय बजट पेश करने का रिकॉर्ड
भारत के संसदीय इतिहास में पहली बार किसी महिला वित्त मंत्री ने इतनी बार बजट पेश किया। यह निरंतरता, भरोसे और प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण है।
बजट में महिलाओं को आर्थिक भागीदार बनाना
उनके बजट भाषणों में महिला केवल सहायता पाने वाली नहीं दिखती, बल्कि आर्थिक तंत्र की सक्रिय इकाई के रूप में उभरती हैं, चाहे वह मुद्रा योजना हो, स्वयं सहायता समूह हों या महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाएं। यह सोच सशक्तिकरण की असली परिभाषा है।
दबाव में भी निर्णय, भावुकता नहीं
आलोचना, वैश्विक मंदी, महामारी, चुनावी दबाव हर दौर में उन्होंने संयम और ठोस आंकड़ों के साथ फैसले लिए। महिला नेतृत्व को भावनात्मक कहने वालों के लिए उनका कार्यकाल एक करारा जवाब है। कोविड संकट में अर्थव्यवस्था को संभालने वाला बजट पैकेज
महामारी के दौरान आत्मनिर्भर भारत पैकेज और राहत योजनाओं के जरिए अर्थव्यवस्था को संभालना आसान नहीं था, उन्होंने यह कर दिखाया।
प्रतीकों से परे, सादगी में ताकत
लाल कपड़े की जगह बही-खाते का डिजिटल टैबलेट, सादा पहनावा और बिना दिखावे की राजनीति के जरिए सीतारमण बताती हैं कि सशक्त महिला को साबित करने के लिए शोर की जरूरत नहीं होती। उनकी मौजूदगी ही काफी है।

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