फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Shakti ›   surabhi and rajeev bansal startup make agarbatti with recycled temple flower

सुरभि और उनके पार्टनर मंदिर के फूलों से तैयार करते हैं अगरबत्ती और हवन कप, जिससे प्रदूषण को किया जा सके कम

Mon, 07 Jun 2021 10:30 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Mon, 07 Jun 2021 10:30 AM IST
सार

महाराष्ट्र के शिरडी में मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों को रिसाइकल करता देख दिल्ली के एक शख्स को ये आइडिया बेहद पसंद आया। जिसके बाद उन्होंने पार्टनर के साथ मिलकर दिल्ली के मंदिरों से फूलों को इकट्ठा कर उनसे ऑर्गेनिक अगरबत्ती, धूपबत्ती और हवन कप बनाने का काम शुरू किया। दिल्ली की निर्मलया नाम की ये संस्था मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों को इकट्ठा कर इस काम को करती है। जिससे ये फूल नदियों में बहकर उसके पानी को प्रदूषित नहीं कर पाते हैं। 

विज्ञापन
surabhi and rajeev bansal startup make agarbatti with recycled temple flower
पड़े गेंदा के फूल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मंदिरों में होने वाली पूजा में भक्त अक्सर प्रसाद से लेकर पैसा तक चढ़ाते हैं। जिनका इस्तेमाल मंदिरों में दान के रूप में किया जाता है। या फिर वो सारे इस्तेमाल हो जाते हैं। लेकिन मंदिर में चढ़ने वाले उन फूलों का क्या? ये फूल केवल कचरे के रूप में पास की नदियों में बहा दिए जाते हैं। इन फूलों में पड़े पेस्टीसाइड और कीटनाशक पानी को प्रदूषित भी करते हैं। ऐसे में दिल्ली की एक संस्था इन फूलों का इस्तेमाल पूजा में जलने वाली अगरबत्ती से लेकर धूप और हवन कप बनाने में किया। दिल्ली के 120 से ज्यादा मंदिरों से जुड़ी ये संस्था वहां से फूलों को इकट्ठा कर आर्गेनिक अगरबत्ती वगैरह बनाकर तैयार करती हैं। 

विज्ञापन

राजीव बंसल ने साल 2019 में महाराष्ट्र के शिरडी में देखा कि कैसे वहां पर चढ़े फूलों को रिसाइकिल किया जाता है। इसके बाद कुछ महीने की रिसर्च के बाद उन्होंने ये जाना कि कैसे फूलों को रिसाइकल कर इस्तेमाल में लिया जाता है। इसके बाद अपनी सिस्टर इन लॉ सुरभि के साथ मिलकर उन्होंने निर्मलाय संस्था की शुरूआत की। 

विज्ञापन
दिल्ली के धाम कॉम्प्लेक्स में फैक्ट्री को बनाया गया। यहां पर अपने रिसाइकिल के अपने तरीके को बनाने के बाद उन्होंने इसे पेटेंट भी करा लिया द काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के अंतर्गत। शुरूआत में इस काम के लिए लगभग 40 महिलाओं को रखा गया था। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से मंदिरों के बंद होने और फूलों के चढ़ावे में कमी की वजह से अब घटकर केवल 15 महिलाएं ही काम पर रहती हैं।  
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed