अपने ही आदर्श को हराकर रियो ओलंपिक्स में बनाई थी जगह, इस बार भी करेंगी देश का प्रतिनिधित्व
मीराबाई चानू भारत का प्रतिनिधित्व टोक्यो ओलंपिक्स में करने जा रही हैं और आज उनसे पूरे देश को उम्मीद है। वे पहले भी कई बार देश का नाम ऊंचा कर चुकी हैं लेकिन रियो ओलंपिक्स में उन्हें सफलता हासिल नहीं हुई थी।
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मीराबाई चानू टोक्यो ओलंपिक्स में वेटलिफ्टर के तौर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वालीं एकमात्र खिलाड़ी हैं। वे 49 किलो वर्ग के लिए भाग लेंगी और पहले भी वह देश का नाम कई बार ऊंचा कर चुकी हैं इसलिए उम्मीद की जा रही हैं कि इस बार भी वे भारत के लिए मेडल लेकर ही आएंगी। आइए जानते हैं मीराबाई चानू के जीवन के बारे में।
कौन है मीराबाई चानू?
मीराबाई चानू का जन्म सुदूर के मणिपुर में हुआ था। वे बचपन से ही तीरंदाजी में अपना करियर बनाना चाहती थीं लेकिन 8वीं कक्षा में उन्होंने वेटलिफ्टिंग में अपना करियर बनाने का सोचा। इम्फाल की वेटलिफ्टर कुंजरानी को प्रेरणा मानकर ही चानू को भी वेटलिफ्टिंग में दिलचस्पी हुई थी।
कुंजरानी को हराया
मीराबाई चानू ने साल 2014 में हुए ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता। इस कैटेगरी का गोल्ड भी भारत के खाते में ही आया था। 2016 के रियो ओलंपिक गेम्स के क्वालीफाई मैच में मीराबाई चानू ने उनकी आदर्श वेटलिफ्टर कुंजरानी को हराकर रियो ओलंपिक गेम्स में अपनी जगह बनाई।
देश का नाम किया रोशन
मीराबाई ने 2017 में हुई वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 48 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल कर देश का नाम रोशन किया था। 2018 में हुए कॉमन वेल्थ गेम्स में भी उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था। इस उपलब्धि के लिए उन्हें खूब सम्मान मिला था।

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