इटली में फंसे हमवतनों को वापस भारत लाने वाली स्वाति रावल की कहानी
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कोरोना का कहर पूरी दुनिया पर आफत बनकर टूटा है। लोगों को घरों में रहने की सलाह दी जा रही है। वहीं सरकार की ओर से 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की जा चुकी है। लोग अपने घर-परिवार को सुरक्षित रहने और घर में रहने के बारे में बता रहें हैं। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो अपने परिवार को कर्तव्य से बड़ा नहीं समझते हैं और समाज की भलाई में दिन-रात लगे हैं। इन्हीं कर्तव्यनिष्ठ लोगों में शामिल है स्वाति रावल का नाम, जो पेशे से कैप्टन हैं। स्वाति ने अपने घर-परिवार और खुद के स्वास्थ्य की चिंता न करते हुए इटली से भारतीयों को वापस लाने वाली टीम का हिस्सा बनीं और इस काम को पूरा किया।
स्वाति पिछले 15 सालों से विमान उड़ा रही हैं और एयर इंडिया के 777 की कमांडर हैं। स्वाति कमांडर होने के साथ ही एक बच्चे की मां भी हैं। स्वाति अपने काम की वजह से अक्सर ही सुर्खियों में रहती हैं। इसके पहले भी उनका नाम तब आया था जब साल 2010 में मुंबई से न्युयार्क जाने वाली फ्लाइट की सभी क्रू मेंबर महिलाएं थीं।
स्वाति का सपना शुरू से ही फाइटर पायलट बनने का था। लेकिन 15 साल पहले वायुसेना में महिलाओं को लड़ाकू पायलट उड़ाने की इजाजत नहीं थी। इसलिए उन्होंने बतौर कमर्शियल पायलट बन विमान उड़ाने की ठानी। इटली से भारतीयों को वापस भारत लाने का ये काम उनकेु इसी काम का हिस्सा था। एयर इंडिया के विमान से उन्होंने 263 भारतीयों को इटली की राजधानी रोम से भारत लाया था।

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