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Sonal Mansingh: भरनाट्यम और ओड़िसी की महागुरु हैं सोनल मानसिंह, जानें इनके बारे में

Sat, 03 Sep 2022 12:20 PM IST
स्वाति शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वाति शर्मा Updated Sat, 03 Sep 2022 12:20 PM IST
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Sonal Mansingh: A dancer with extreme grace
भावपूर्ण प्रस्तुति की दक्ष सोनल मानसिंह - फोटो : facebook

उम्र को महीनों और सालों में गिनें, तो अगले दो बरस में डॉ. सोनल मानसिंह 80 के खूबसूरत आंकड़े को छू लेंगी। यूँ उनके व्यक्तित्व और इस आंकड़े का कोई मेल नहीं है। वे नृत्य के लिए एक अनुभवी और अनुशासन पसन्द गुरु हैं तो मोटिवेशनल स्पीकर की भूमिका निभाते हुए एक नवयौवना की तरह उत्साहित और उल्लासित। अपनी कला को उन्होंने जीवन सा ही जिया है, इसलिए आज भी उनकी आँखें और मुद्राएं उतनी ही चपल हैं कि उनके इशारे मात्र पर कहानी कह जाती हैं। दुनियाभर में उनके नृत्य के प्रशंसक मौजूद हैं और देश-विदेश में उनके शिष्य भी।

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सोनल जी के लिए नृत्य केवल कला का रूप ही नहीं है। वह मानती हैं कि यह तो जीवन का एक सहज-सामान्य हिस्सा है जिसे हर इंसान को जीना चाहिए। नृत्य हमें न केवल भावनात्मक तौर पर मजबूत और अधिक सकारात्मक बनाता है बल्कि यह शरीर और मन दोनों के ऊर्जावान बने रहने में योगदान भी देता है। इसलिए आज भी वे नृत्य और खासकर शास्त्रीय नृत्य को युवाओं व आमजन तक पहुंचाने का प्रयास जारी रखे हुए हैं। 

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Sonal Mansingh: A dancer with extreme grace
Sonal mansingh - फोटो : Facebook

पहला प्रेम भरतनाट्यम दूसरा ओड़िसी 

सोनल मानसिंह के जन्म के वक्त (1944 में) भारत आज़ाद होने की तमाम कोशिशों में लगा था। सोनल जी के पिताजी समाज उत्थान के कार्यों से जुड़े व्यक्ति थे तो दादाजी स्वतंत्रता सेनानी। जाहिर था कि देश की संस्कृति और देश की मिटटी की महक इस परिवार के संस्कारों में थी। मात्र 4 साल की उम्र में सोनल जी ने मणिपुरी नृत्य शैली का अभ्यास प्रारम्भ कर दिया था लेकिन दो-ढाई साल के अभ्यास के बाद उन्हें भरतनाट्यम शैली ने आकर्षित किया और उन्होंने इसे सीखना शुरू कर दिया। यह अभ्यास तो था लेकिन सोनल मानसिंह की असली नृत्य शिक्षा प्रारम्भ हुई जब वह 18 वर्ष की हुईं और परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने बैंगलोर जाकर भरतनाट्यम  की विधिवत शिक्षा लेना प्रारम्भ किया।

उस दौर में किसी महिला का अकेले दूसरे शहर में जाकर नृत्य की शिक्षा लेना एक कठिन और दुस्साहस भरा काम था लेकिन सोनल अडिग रहीं। इसी बीच ओड़िसी नृत्य की भावभंगिमाओं और मुद्राओं ने डॉ. सोनल का मन मोहा और वे ओड़िसी नृत्य के महागुरु स्व. श्री केलुचरण मोहपात्रा की शिष्य बन गईं। 

कई हैं उपलब्धियां 

जिस उम्र में बच्चे ठीक से खाना और दौड़ना सीख रहे होते हैं, सोनल जी ने उसी उम्र से कला के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया था। भरतनाट्यम और ओड़िसी के अलावा अन्य शैलियों और कलाक्षेत्रों में भी उन्होंने दक्षता हासिल की। वह मणिपुरी के साथ ही कुचिपुड़ी और छाऊ नृत्य शैलियों में भी पारंगत हैं। इतना ही नहीं सोनल जी ने संस्कृत और जर्मन भाषाओं की भी पढ़ाई की है। वे नृत्य का प्रशिक्षण देने के साथ सामजिक कार्यों में भी सक्रिय रहती हैं।

Sonal Mansingh: A dancer with extreme grace
सोनल मानसिंह जी का सम्मान

उनकी अभूतपूर्व प्रतिभा, कला क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार की ओर से उन्हें पदम् भूषण व पदम् विभूषण सम्मान दिए गए और ख़ास बात यह कि वह पद्म भूषण सम्मान प्राप्त करने वाली सबसे कम उम्र की हस्ती बनीं और पदम् विभूषण सम्मान पाने वाली प्रथम तीन महिला नृत्यांगनाओं में से एक भी। इसके अतिरिक्त उन्हें संगीत नाटक एकेडमी अवार्ड, कालिदास सम्मान व अन्य कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। सोनल जी यह मानती हैं कि आजकल शास्त्रीय नृत्य को लेकर लोगों में गंभीरता कम और जल्दी सीखकर परफॉर्म करने की आतुरता ज्यादा है, जबकि यह कला समय मांगती है साथ ही बहुत सारा अनुशासन भी। उनका मानना है कि यदि स्कूली शिक्षा में भारतीय शास्त्रीय कलाओं और विधाओं को भी जोड़ा जाए तो इसका असर अधिक व्यापक और गहरा हो सकता है। 


सबके लिए हैं प्रेरणा 

केवल एक नृत्यांगना के तौर पर ही नहीं, एक मजबूत, सशक्त और संवेदनशील व्यक्तित्व के रूप में भी सोनल जी, बाकी सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। यही कारण है कि कला के क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान और उनके व्यक्तित्व की आभा को देखकर, फिल्म निर्देशक प्रकाश झा ने उनपर एक डॉक्यूमेंट्री 'सोनल' बनाई थी जिसे नेशनल फिल्म अवार्ड फॉर बेस्ट नॉन फीचर फिल्म श्रेणी के अंतर्गत पुरस्कृत भी किया गया। सोनल जी की इच्छा है कि वे हर एक व्यक्ति को नृत्य की भावना से परिचित करवा सकें और इसके लिए वे निरंतर साधनारत हैं, प्रशिक्षण दे रही हैं। 

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