फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Shakti ›   shakti: lara dutta gives useful parenting tips

शक्ति: लारा दत्ता ने दिए पैरेंटिग टिप्स, कहा "बच्चों को टीवी दिखाकर खाना खिलाने की आदत न डालें"

Fri, 20 Dec 2019 10:34 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Fri, 20 Dec 2019 10:34 AM IST
विज्ञापन
shakti: lara dutta gives useful parenting tips
lara dutta - फोटो : instagram

बच्चों की परवरिश करना कोई आसान काम नहीं है। एक मां होने के नाते हर महिला की जिम्मेदारी होती है कि वो बच्चे को अच्छी आदतें सिखाएं। ताकि भविष्य में वो एक स्वस्थ इंसान के साथ ही अच्छा नागरिक बन सके। क्योंकि कहा गया है कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन बसता है। इस बारे में जब बॉलीवुड अदाकारा लारा दत्ता से बात की गई तो उन्होंने पैरेंटिग को लेकर कई सारे टिप्स दिए। 

विज्ञापन

 

shakti: lara dutta gives useful parenting tips
उन्होंने कहा कि 19 साल हो चुके हैं मुझे मिस यूनीवर्स का खिताब जीते लेकिन अब भी एक प्रभावकारी शख्सियत के तौर पर लोग मुझसे ब्यूटी टिप्स पर खूब बातें करना चाहते हैं। मैं करती भी हूं लेकिन मुझे क्या लगता है कि खूबसूरती वह नहीं जो नजर आती है। इंसान को भीतर से भी सुंदर होना चाहिए और अगर आप अभिभावक हैं तो यही सुंदरता आपको अपनी अगली पीढ़ी को भी स्थानांतरित करने की कोशिश करनी चाहिए। 
आज आप किसी के भी घर चले जाइए, किसी सामूहिक कार्यक्रम या आयोजन में चल जाइए लोग अपने बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स थमाकर दूसरों से बातें करते रहते हैं। लोगों को इस बात का गुमान भी होता है कि उनका बच्चा आईफोन या आईपैड चला लेता है।

तीन महीने के बच्चा आईपैड अनलॉक करना सीख चुका है। स्क्रीन पर ऐप्स आते ही उसे ये भी पता होता कि उसे कौन सा ऐप खोलकर क्या करना है? इन अभिभावकों को लगता है कि उनके बच्चे नई सदी के बच्चे हैं और पैदा ही स्मार्ट हुए हैं। लेकिन, इन्हें ये समझना जरूरी है कि आखिर बच्चे के हाथ में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स आए कैसे?


 
विज्ञापन
विज्ञापन

shakti: lara dutta gives useful parenting tips
ज्यादातर अभिभावक बच्चों को फोन या आईपैड क्यों थमाते हैं? इसी सवाल में पालन पोषण का ये अहम पहलू छुपा है। हमारे फोन, लैपटॉप या आईपैड सब हमारे आसपास बिखरे पड़े होते हैं। माता-पिता किसी को फोन कर रहे हैं या किसी का फोन रिसीव कर रहे हैं और बच्चे ने थोड़ा सा भी तंग किया तो झुनझुने की तरह उसे आईपैड थमा देते हैं कि बेटा ये लो, इससे खेलो।

बच्चों को उनके माता-पिता अपने फोन या दूसरे गैजेट्स इसलिए थमा देते हैं कि वे व्यस्त रहे। दो साल के पहले तक की उम्र बच्चों के लिए बहुत अहम होती है। इस समय आप अपने बच्चे को कितनी देर तक किसी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट की स्क्रीन के सामने रहने देते हैं, इसका उनके ऊपर बहुत गहरा असर होता है।

आज के अभिभावकों के लिए बच्चों को व्यस्त रखने का ये सबसे आसान तरीका है। बच्चा स्क्रीन के सामने व्यस्त रहता है तो वे अपना दूसरा काम कर पाते हैं। उन्हें लगता है कि बच्चा अभी छोटा है तो खेलने देते हैं और जब वह बड़ा होगा तो हम उससे ये चीजें धीरे-धीरे दूर कर देंगे। लेकिन, ऐसा होता नहीं हैं। आप उसके बड़े होने पर ये नहीं कह सकते है कि बेटा, हमने आपको स्क्रीन के सामने इसलिए बिठाया ताकि आप ठीक से खा सको। अब आप बड़े हो गए हो तो अब ये सब आप नहीं देख सकते। आप ऐसा करेंगे, तो बच्चा जिद्दी होगा और खाना नहीं खाएगा।


 
विज्ञापन

मेरी दिल की डायरी में ऐसे सबक बहुत शुरू से दर्ज हैं। बच्चे के अभिभावक के तौर पर आपकी जिम्मेदारी पहले दिन से शुरू हो जाती है। अगर मैं अपनी बेटी सायरा की बात करूं तो मैं उसे पूरे दिन में सिर्फ 30 मिनट का स्क्रीन टाइम देती हूं। वह कुछ भी देखे। उसे आईपैड पसंद हो, लैपटॉप पसंद हो या टीवी देखना पसंद हो, लेकिन समय मैं उसे सिर्फ 30 मिनट ही देती हूं। और, इस बात का खास ध्यान रखती हूं कि खाना खाते समय उसके सामने किसी तरह का कोई स्क्रीन न होता।

मेरा ये भी मानना है कि बच्चों में खाने की अच्छी आदतें डालने के लिए आपको अपने बच्चों को शुरू से रसोईघर में साथ ले जाना चाहिए। हमारे घर में मेरी दोनों बहनों तक ये रिवाज रहा भी।  लेकिन मैं जब किचन में जाती थी तो मुझे डांट पड़ती थी। इसका असर मुझ पर ये हुआ कि सही खाने को लेकर मेरी दिक्कतें बहुत दिनों तक बनी रहीं। मैं 16 साल की थी, जब मुंबई आ गई। और, जब सायरा हुई तो मुझे तमाम सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऐसा नहीं है कि घर पर जो हो रहा है, बच्चों पर सिर्फ उसी का असर होता है, स्कूल में, दोस्तों के घरों पर होने वाली बातों का भी बच्चों के मानसिक विकास पर सीधा असर होता है।


 

सायरा के लिए मैं बच्चों के साथ प्ले डेट्स (खेलने का दिन) आयोजित करती रही हूं, उसकी उम्र के बच्चे आते हैं तो उनका माएं मुझे तमाम तरह की हिदायतें भेजती हैं कि उनके बच्चे को इस चीज से एलर्जी है, उनका बच्चा ये नहीं खाता। आजकल के बच्चे सोया नहीं खा सकते, फलियां नहीं खा सकते, अखरोट, काजू, बादाम नहीं खा सकते, दूध नहीं पीते हैं वो, तो मैं अक्सर उनसे पूछती कि फिर ये खाएंगे क्या? दाल, रोटी, सब्जी तो चलेगा ना? 

मेरा मानना है कि बच्चों को शुरू से खाना बनाने का प्रक्रिया में साथ रखना चाहिए। ये मैंने अपनी बेटी के साथ सीखा। तो जब मैं सायरा को भिंडी खिलाने की कोशिश करती हूं तो पहले उसे अपने साथ रसोईघर ले जाती हूं। हम साथ मिलकर भिंडिंयां धोते हैं, काटते हैं और साथ ही उसे पकाते हैं।

इस दौरान उसे ये भी समझाने की कोशिश करती हूं कि ये सब्जी कैसे बन रही है, क्या-क्या मसाले इसमें डाले जा रहे हैं। अब जब खाना तैयार होता है और वह खाने की टेबल पर आती है तो उसे इस बात की खुशी होती है कि उसने मां के साथ मिलकर जो बनाया, अब उसे खाने की बारी है। जाहिर है बच्चों में खाने को लेकर दिलचस्पी तभी पैदा होगी, जब आप उन्हें अपने साथ खाना बनाने देंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed