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Corona Warrior: वो महिला जिन्होंने घरेलू मास्क को घर-घर पहुंचाया

Tue, 28 Apr 2020 09:57 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: निलेश कुमार Updated Tue, 28 Apr 2020 09:57 AM IST
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Shailaja Vaidya Gupta The Woman Who makes a revolution to Homemade Masks to prevent coronavirus
शैलजा वी गुप्ता - फोटो : Twitter

11 अप्रैल को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब देश भर के नेताओं से वीडियो कॉन्फ्रेंसंग के जरिए बात कर रहे थे उस वक्त वे घरेलू सफेद मास्क इस्तेमाल कर रहे थे। इससे पांच दिन पहले, उनकी सरकार ने घनी आबादी वाले शहरों में रहने वाले लोगों से अपील की थी कि घर से बाहर निकलते वक्त कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के लिए घरेलू मास्क का इस्तेमाल करें। मास्क के इस्तेमाल को लेकर भारत ने इससे पहले अलग नजरिया अपनाया था, पहले सरकार की ओर से कहा गया था कि केवल संक्रमित लोगों को ही मास्क पहनना है।

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इस नीतिगत बदलाव और घरेलू मास्क के इस्तेमाल पर जोर देने के पीछे एक महिला बायोकेमिस्ट की अहम भूमिका रही है। यह महिला वैज्ञानिक हैं- 58 साल की शैलजा वी गुप्ता। शैलजा भारत सरकार में प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के ऑफिस में वैज्ञानिक हैं। उनका काम सरकार के लिए नीतियों को बनाना और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल संबंधी सुझाव देना है।
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मास्क के उपयोग पर बहस
शैलजा ने बताया, "भीड़ भाड़ वाली जगह पर संक्रमण पर अंकुश के लिए घरेलू मास्क का उपयोग सही उपाय है। उदाहरण के लिए जो लोग झुग्गी झोपड़ियों में रहते हैं उन्हें तो सस्ता और आसान उपाय चाहिए। ऐसे में घरेलू मास्क लोगों को संक्रमण से बचा सकता है।"
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वैसे दुनिया भर में बचाव के उपाय के लिहाज से घरेलू मास्क और दूसरे मास्क के उपयोग को लेकर बहस जारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि मास्क पहनने से कोरोनो से बचाव के पक्ष में बहुत ज्यादा सबूत नहीं मिले हैं। इसके बाद भी चीन, हॉन्गकॉन्ग सहित कई एशियाई देशों ने अपने यहां मास्क के प्रयोग को अनिवार्य किया है। इस बहस में कहा जा रहा है कि बहुत सारे संक्रमित लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं दिखे हैं, ऐसे में अनजाने रूप में फैलने वाले संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए मास्क जरूरी है।

Shailaja Vaidya Gupta The Woman Who makes a revolution to Homemade Masks to prevent coronavirus
Shailja Vaidya Gupta - फोटो : Twitter

कोरोना से बुरी तरह प्रभावित अमरीका और ब्रिटेन जैसे देशों में भी मास्क का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने लोगों से उन सार्वजनिक जगहों पर घरेलू मास्क पहनने की सिफारिश की, जहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल हो। यह सलाह कम्युनिटी ट्रांसमिशन की आशंका वाले जगहों को ध्यान में रखकर दी गई है।

भारत जैसे मुल्क में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्वीपमेंट्स (पीपीई) की कमी है और सर्जिकल मास्क खरीदना हर किसी के लिए संभव नहीं है, ऐसे में शैलजा गुप्ता के मुताबिक घरेलू मास्क से लोगों को बचाने में मदद मिलेगी। शैलजा गुप्ता भारत के शीर्ष इंजीनियरिंग कॉलेज इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी की पूर्व छात्रा हैं। वह देश के सबसे अभावग्रस्त इलाकों में भी काम कर चुकी है।

शैलजा मुंबई के सबसे बड़े झुग्गी झोपड़ी वाले धारावी में आउटरीच ऑफिसर के तौर पर पर काम कर चुकी हैं। इस इलाके में उन्होंने गरीब तबके के बच्चों को सस्ते माइक्रोस्कोप से जीवाणुओं के बारे में जागरूक किया है। जब भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने लगा, तो शैलजा गुप्ता ने घर पर मास्क बनाने के तरीके का एक मैन्युएल तैयार किया और भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं में उसका अनुवाद कराया।

इसके अलावा कोरोना संक्रमण के खिलाफ हर रणनीति में वह घरेलू मास्क को जरूरी हिस्से के तौर पर अपनाने की सलाह देती रहीं। अपने तर्क को दमदार बनाने के लिए शैलजा अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में मास्क के इस्तेमाल से जुड़े शोध पत्रों का हवाला भी देती हैं। चेक गणराज्य और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में घरेलू मास्क का इस्तेमाल लगातार किया जा रहा है। चेक गणराज्य में तो मास्क के बिना बाहर निकलना गैर कानूनी है।

Shailaja Vaidya Gupta The Woman Who makes a revolution to Homemade Masks to prevent coronavirus
Shailja Vaidya Gupta - फोटो : Twitter

सस्ता उपाय है घरेलू मास्क
शैलजा गुप्ता के मुताबिक घरेलू मास्क किसी भी रंग के नए या पुराने सूती कपड़े से बनाया जा सकता है। उनके मुताबिक नौ गुना सात इंच की साइज में काटे गए कपड़े में चार डोरियां लगाने भर से फेस मास्क तैयार हो जाता है। इस घरेलू मास्क के जरिए मुंह और नाक को ढंका जा सकता है।
 
घरेलू मास्क को नियमित तौर पर साबुन और पानी से धोते रहना चाहिए। इसे फिर से इस्तेमाल करने लायक बनाना बहुत सस्ता है। दूसरी ओर प्लास्टिक फैब्रिक से बने डिस्पोजेबल सर्जिकल मास्क की कीमत दस रुपए है। डॉक्टरों और नर्सों के इस्तेमाल वाले एन95 मास्क की कीमत किसी दिहाड़ी मजदूर के एक दिन की आमदनी से भी ज्यादा 500 रुपए के करीब है।

भारत सरकार ने यह भी कहा है कि देश के 27 राज्यों के करीब 78 हजार स्वयंसेवी समूहों द्वारा दो करोड़ घरेलू मास्क तैयार कर लिए गए हैं। शैलजा गुप्ता के मुताबिक देश को जल्दी ही ऐसे एक अरब मास्क की जरूरत होगी। देश के अखबार समूह ने लोगों से अपना मास्क खुद बनाने की अपील करते हुए मास्क इंडिया अभियान ही शुरू कर दिया है।

आधिकारियों के मुताबिक इस अभियान का पूरा श्रेय शैलजा गुप्ता को जाता है। भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने बताया, "फेस मास्क की जरूरत को लेकर शैलजा की सोच स्पष्ट थी। उन्होंने अपनी टीम से एक प्रभावी मैन्युएल तैयार कराया। इस अभियान को आगे ले जाने को लेकर उनमें दृढ़ता भी थी, उनकी कोशिशों के चलते परिणाम साकारात्मक रहे।"

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