Sana Ramchand Gulwani: पाकिस्तान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास करने वाली पहली हिंदू महिला के बारे में जानें
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पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बद्दतर हालत को लेकर अक्सर मामले सामने आते रहते हैं। हिंदूओं के साथ अत्याचार, अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के उत्पीड़न को पाकिस्तान में आम बात मानी जाती है। लेकिन अगर एक हिंदू पाकिस्तान की प्रशासनिक सेवा का हिस्सा हो, खासकर एक हिंदू लड़की तो ये सभी के लिए हैरानी की बात होगी। एक हिंदू लड़की ने न केवल इस हैरान कर देने वाली बात को अंजाम दिया बल्कि पाकिस्तान में हिंदू समुदाय के लोगों के लिए एक मिसाल बन गयी। हम बात कर रहे हैं डॉक्टर सना रामचंद गुलवानी की। सना रामचंद गुलवानी पाकिस्तानी हिन्दू हैं, जो इन दिनों खूब चर्चा में हैं। उन्होंने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसके बाद पाकिस्तान के हिंदुओं के साथ ही दुनिया भर के हिंदू गर्व महसूस कर रहे हैं।
सना रामचंद गुलवानी के बारे में जानें
सना रामचंद गुलवानी पाकिस्तान के शिकारपुर की रहने वाली हैं। ये जिला सिंध प्रांत में स्थित है और पाकिस्तान का सबसे ज्यादा हिंदू आबादी वाला इलाका है। सना की शुरूआती शिक्षा शिकारपुर के ही एक सरकारी स्कूल से हुई। जिसके बाद सना ने बेनजीर भुट्टो मेडिकल यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ मेडिसिन की पढ़ाई पूरी की और डिग्री मिलने के बाद सर्जन बन गईं। उनके पास यूरोलॉजी में डिग्री हैं। एमबीबीएस पास करने के बाद भी सना रुकी नहीं। सना पाकिस्तान की सिविल सर्विसेज में शामिल होना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने प्रशासनिक सेवा के लिए तैयारी शुरू की।
सना के माता पिता नहीं चाहते थे कि सना प्रशासनिक सेवा में जाएं। लेकिन सना ने पहले अपने माता पिता का सपना पूरा करते हुए एमबीबीएस किया और फिर सीएसएस के लिए पढ़ाई शुरू की। बता दें कि सीएसएस पाकिस्तान की शीर्ष सार्वजनिक सेवा सेंट्रल सुपीरियर सर्विसेज है, जैसे भारत में यूपीएससी के तहत आईएएस की परीक्षा होती है।
सीएसएस परीक्षा पास करने वाली हिंदू लड़की
ये सना की मेहनत और काबलियत का नतीजा था कि साल 2020 में सना ने अपने पहले ही प्रयास में सीएसएस परीक्षा पास कर ली। जिसके बाद पाकिस्तान प्रशासनिक सेवा में सिंध की ग्रामीण सीट पर अपनी जगह बना ली। उनकी ये उपलब्धि इसलिए अधिक खास है क्योंकि सना पाकिस्तान के इतिहास में पहली हिंदू महिला हैं जिन्होंने सीएसएस पास किया है।
मेडिकल के बाद सना ने क्यों प्रशासनिक सेवा में जाने का लिया फैसला
एमबीबीएस की डिग्री होने के बाद भी सना ने सिविल सर्विसेज में जाने का फैसला लिया। उन्होंने अपनी राह एक घटना की वजह से बदल दी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सना ने शिकारपुर के एक छोटे से शहर लखी में अपनी मेडिकल की प्रैक्टिस शुरू की थी। वहां स्थित तालुका अस्पताल में एक महिला चिकित्सा अधिकारी के रूप में सना कुछ महीने तैनात रहीं। इस दौरान उन्होंने पाया कि ग्रामीण सिंध में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा की स्थिति बदहाल है। दवाओं से लेकर मेडिकल की अन्य सुविधाओं तक की कमी दिखी। इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि वह सिविल सर्विस में अपना करियर बनाएंगी और एक अधिकारी के तौर पर इन कमियों को दूर करने का प्रयास करेंगी।

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