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Republic day 2025: इस मुस्लिम महिला के खिलाफ मौलवियों ने जारी किया था फतवा, संविधान निर्माण में थी अहम भूमिका

Sun, 26 Jan 2025 07:35 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sun, 26 Jan 2025 07:35 AM IST
सार

बेगम एजाज रसूल भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका की मिसाल थीं और आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर बेगम कुदसिया एजाज रसूल के बारे में जानिए।
 

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Republic Day 2025 Begum Aizaz Rasul Muslim Woman Faced Fatwa by Clerics Played Crucial Role in Constitution
संविधान निर्माण में था इन महिलाओं का योगदान - फोटो : Amar ujala

विस्तार

Republic Day 2025 Begum Aizaz Rasul:  26 जनवरी को भारत का संविधान आधिकारिक तौर पर अपनाया गया था। भारतीय संविधान के निर्माण में 15 महिलाओं की भूमिका सराहनीय थी। एक महिला ऐसी भी थी, जिनका भारतीय राजनीति और संविधान निर्माण में एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व थीं। महिला का नाम बेगम कुदसिया एजाज रसूल है। उनके योगदान और विचार आज भी प्रासंगिक हैं। बेगम कुदसिया एजाज रसूल ने न केवल संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि उन्होंने धर्मनिरपेक्षता, महिला सशक्तिकरण, और सामाजिक सुधारों के लिए अपनी आवाज बुलंद की। वह भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका की मिसाल थीं और आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर बेगम कुदसिया एजाज रसूल के बारे में जानिए।

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बेगम कुदसिया एजाज रसूल का प्रारंभिक जीवन

बेगम कुदसिया एजाज रसूल का जन्म 4 अप्रैल 1908 को अविभाजित पंजाब के मलेरकोटला में हुआ था। वह नवाब जुल्फिकार अली ख़ान के परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनकी शादी नवाब एजाज रसूल से हुई थी।
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राजनीतिक करियर

भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत अपने पति के साथ मुस्लिम लीग में शामिल हुईं। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुनाव लड़ा।  वह 299 सदस्यों वाली संविधान सभा में एकमात्र मुस्लिम महिला सदस्य थी। उन्होंने अल्पसंख्यकों के आरक्षण का विरोध किया था। उन्होंने सरदार पटेल द्वारा अलग निर्वाचक मंडल और आरक्षण हटाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। बेगम एजाज 1950 में मुस्लिम लीग भंग होने के बाद कांग्रेस का हिस्सा बनीं। बाद में 1952-1956 तक राज्यसभा सदस्य रहीं। 1969-1989 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य भी रहीं। 1969-1971 के बीच उत्तर प्रदेश की समाज कल्याण और अल्पसंख्यक मंत्री रहीं।  
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जब वह पर्दे से निकलकर सियासत में एक्टिव हुईं तो मौलवियों ने उनके खिलाफ फतवे दिए। उन्हें सन् 2000 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है। भारतीय राजनीति में अल्पसंख्यक और महिला अधिकारों पर उनके विचार क्रांतिकारी माने जाते हैं।  

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