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Gayatri Kumari: बिहार की गायत्री को मिला राष्ट्रपति से सम्मान, ससुर के विरोध के बावजूद किया था ये काम
Mon, 03 Jul 2023 03:14 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Mon, 03 Jul 2023 03:14 PM IST
सार
22 जून 2023 को राष्ट्रपति भवन में फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड 2022 और 2023 दिया गया। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 15 नर्सों /एएनएम वर्कर्स को फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड से सम्मानित किया।
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National Florence Nightingale Award
- फोटो : Twitter
विस्तार
National Florence Nightingale Award: महिलाएं जब घर की चारदीवारी से निकल अपने पैरों पर खड़े होना चाहती हैं, तो अक्सर ही उन्हें विरोध का सामना करना पड़ जाता है। कभी आस-पड़ोस और रिश्तेदार तो कभी कार्यक्षेत्र के साथियों का बर्ताव उन्हें पीछे धकेलने का काम करता है। लेकिन कुछ कर दिखाने की चाह, आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का सपना हर तरह के ताने और विरोध को पीछे छोड़ देता है।
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हाल ही में बिहार की एक महिला को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार से सम्मानित किया है। इस महिला का नाम गायत्री कुमारी है। गायत्री कुमारी का सम्मानित होना दो तरीके से खास है। पहला यह कि वह बिहार की इकलौती महिला हैं, जिसे इसे यह पुरस्कार मिला और दूसरा जिस कार्य के लिए वह सम्मानित की गईं, उसके लिए वह अपने ससुर के खिलाफ तक चली गई थीं। आइए जानते हैं गायत्री कुमारी की उपलब्धि और सम्मान हासिल करने तक के सफर के बारे में।
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कौन हैं गायत्री कुमारी
22 जून 2023 को राष्ट्रपति भवन में फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड 2022 और 2023 दिया गया। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 15 नर्सों /एएनएम वर्कर्स को फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड से सम्मानित किया। पुरस्कृत होने वाली नर्सों की लिस्ट में बिहार की इकलौती महिला गायत्री कुमारी का नाम शामिल है। गायत्री कुमारी बिहार में कार्यरत एएनएम वर्कर हैं।
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क्यों मिला पुरस्कार
गायत्री कुमारी को सम्मानित किए जाने का कारण था, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, जच्चा-बच्चा की सुरक्षा और कोविड काल में लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने के लिए तत्परता को देखते हुए दिया गया। गायत्री कुमारी का नाम जिला प्रशासन ने रेफर किया था।
गायत्री कुमारी की शिक्षा और करियर
गायत्री कुमारी के पास बीएड और एमएड की डिग्री है। गायत्री के पति आलोक कुमार सरकारी टीचर हैं। पढ़ाई के बाद गायत्री ने नर्स बनने का विचार किया। वर्ष 2008 में गायत्री कुमारी का चयन स्वास्थ्य विभाग में नर्स सेवा के लिए हो गया। पति और बच्चों ने भी गायत्री कुमारी का साथ दिया। हालांकि उनके ससुर गायत्री के इस कार्य से नाखुश थे। वह नहीं चाहते थे कि बहू नर्स का कार्य करे।
लेकिन गायत्री ने ससुर के विरोध के बावजूद नर्स का कार्य किया। उन्हें पहली पोस्टिंग गबय गांव के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मिली। गायत्री का वेतन उन दिनों महज 6 हजार रुपये होता था। कोविड काल में गायत्री फ्रंटलाइन वॉरियर्स के रूप में कार्य करती रहीं।

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