फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Shakti ›   Pitru Paksha 2024 Women Perform Pind daan Shradh Rules Pind Dan Kaun Kar Sakta Hai in Hindi

Pitru Paksha 2024: स्त्रियों को भी है पिंडदान का अधिकार, जानें क्या कहते है नियम

Tue, 17 Sep 2024 09:20 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Tue, 17 Sep 2024 09:20 AM IST
सार

यदि किसी के पुत्र न हो और पत्नी जीवित हो, तो ऐसी स्थिति में पत्नी दिवंगत पति की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध-कर्म कर सकती है। किसी के न होने पर पुत्री भी श्राद्ध-कर्म कर सकती है। उसी कुल की विधवा स्त्री भी पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध-कर्म कर सकती है।

विज्ञापन
Pitru Paksha 2024 Women Perform Pind daan Shradh Rules Pind Dan Kaun Kar Sakta Hai in Hindi
महिलाओं को भी है पिंडदान का अधिकार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पं. मकरंद मिश्र

विज्ञापन


यदि परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं है तो ऐसी स्थिति में स्त्री भी संकल्प लेकर श्राद्ध कर सकती है। शास्त्रों ने इसके लिए कुछ नियम बताए हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, समय से श्राद्ध करने से कुल में कोई दुखी नहीं रहता। पितरों की पूजा करके मनुष्य आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, श्री, पशु, सुख और धन-धान्य प्राप्त करता है। इस तरह विभिन्न धर्म ग्रंथों में देवकार्य से भी अधिक पितृ कार्य का महत्व बताया गया है। यही कारण है कि देव पूजन से पूर्व पितृ पूजन किए जाने का विधान है।

Pitru Paksha 2024 Women Perform Pind daan Shradh Rules Pind Dan Kaun Kar Sakta Hai in Hindi
महिलाओं को भी है पिंडदान का अधिकार - फोटो : istock

वास्तव में, श्राद्ध शब्द श्रद्धा से बना है और श्रद्धा, श्राद्ध का प्रथम अनिवार्य तत्व है, अर्थात पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना ही श्राद्ध है। लेकिन प्रश्न यह है कि पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध-कर्म कौन-कौन कर सकता है? शास्त्रों में कहा गया है कि पिता का श्राद्ध पुत्र को करना चाहिए। एक से अधिक पुत्र होने पर सबसे बड़ा पुत्र श्राद्ध करता है। पुत्र के न होने पर पौत्र या प्रपौत्र को भी श्राद्ध करने का अधिकार प्राप्त है। पुत्र, पौत्र या प्रपौत्र के न होने पर पुत्री का पुत्र श्राद्ध-कर्म कर सकता है। इसके भी न होने पर भतीजा भी श्राद्ध कर सकता है। गोद लिया पुत्र भी श्राद्ध का अधिकारी होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

Pitru Paksha 2024 Women Perform Pind daan Shradh Rules Pind Dan Kaun Kar Sakta Hai in Hindi
महिलाओं को भी है पिंडदान का अधिकार - फोटो : अमर उजाला

स्मृति संग्रह और श्राद्ध कल्पलता के अनुसार, सपिंड अर्थात पूर्व की सातवीं पीढ़ी तक के परिवार का सदस्य, सोदक अर्थात आठवीं पीढ़ी से चौदहवीं पीढ़ी तक का पारिवारिक सदस्य भी श्राद्ध करने का अधिकारी माना गया है। इस क्रम में कोई न मिले, तो माता के कुल के सपिंड और सोदक को भी श्राद्ध करने का अधिकारी माना गया है।


लेकिन इन सब में महिलाओं को लेकर अक्सर यह सवाल उठते रहते हैं कि क्या वे श्राद्ध करने की अधिकारी हैं? किन परिस्थितियों में वे अपने पूर्वजों का पिंडदान करने की पात्र हैं?

विज्ञापन

Pitru Paksha 2024 Women Perform Pind daan Shradh Rules Pind Dan Kaun Kar Sakta Hai in Hindi
महिलाओं को भी है पिंडदान का अधिकार - फोटो : adobe stock

इस संबंध में शास्त्रों में कहा गया है कि यदि किसी के पुत्र न हो और पत्नी जीवित हो, तो ऐसी स्थिति में पत्नी दिवंगत पति की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध-कर्म कर सकती है। किसी के न होने पर पुत्री भी श्राद्ध-कर्म कर सकती है। उसी कुल की विधवा स्त्री भी पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध-कर्म कर सकती है। पिता एवं माता के कुल में कोई न हो, तो स्त्री को भी श्राद्ध करने का अधिकार प्राप्त है। लेकिन श्राद्ध करने से नाबालिग लड़कियों को रोका गया है, लेकिन विवाहित महिलाएं श्राद्ध करने की पात्र हैं। पति या पुत्र बीमार है, तो उसके हाथ का स्पर्श कराकर महिला श्राद्ध-कर्म कर सकती है। घर में कोई वृद्ध महिला है, तो युवा महिला से पहले श्राद्ध करने का अधिकार उसका होगा।

Pitru Paksha 2024 Women Perform Pind daan Shradh Rules Pind Dan Kaun Kar Sakta Hai in Hindi
महिलाओं को भी है पिंडदान का अधिकार - फोटो : istock

विधवा स्त्री अगर संतानहीन हो


वैदिक परंपरा के अनुसार, महिलाएं यज्ञ, अनुष्ठान, संकल्प और व्रत आदि तो रख सकती हैं, लेकिन श्राद्ध की विधि को स्वयं नहीं कर सकती हैं। विधवा स्त्री अगर संतानहीन हो, तो अपने पति के नाम श्राद्ध का संकल्प रखकर ब्राह्मण या पुरोहित परिवार के पुरुष सदस्य से ही पिंडदान आदि का विधान पूरा करा सकती है। इसी प्रकार जिन पितरों के कन्याएं ही वंश परंपरा में हैं, तो उन्हें पितरों के नाम व्रत रखकर उसके दामाद या धेवते, नाती आदि ब्राह्मण को बुलाकर श्राद्ध-कर्म की निवृत्ति करा सकते हैं। साधु-संतों के शिष्य गण या शिष्य विशेष श्राद्ध कर सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed