फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Shakti ›   Pithoragarh Women Entrepreneur Babita Singh Success Story In hindi

तुमसे है उजाला: उत्तराखंड की बबीता ने महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, वीरान गांव के लिए किया ये काम

Thu, 21 Aug 2025 04:24 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Thu, 21 Aug 2025 04:24 PM IST
सार

खूबसूरत वादियों के राज्य उत्तराखंड की बबीता जब वर्षों बाद अपने घर पहुंचीं तो वहां रहने वाले लोगों की स्थिति को देख विचलित हो उठीं। उन्होंने संकल्प लिया कि वह इस स्थिति को बदलकर रहेंगी और रोजगार के इतने साधन उत्पन्न करेंगी कि किसी को भी धन कमाने के लिए गांव छोड़ना नहीं पड़ेगा।

विज्ञापन
Pithoragarh Women Entrepreneur Babita Singh Success Story In hindi
बबीता सिंह - फोटो : babita singh

विस्तार

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के सुदूरवर्ती गांव पसमा की रहने वाली बबीता सिंह ने 2021 में जब अपने पैतृक गांव की ओर रुख किया तो उन्हें वहां का बदला हुआ रूप विचलित कर गया। चारों ओर बंजर भूमि, बेरोजगारी और सबसे अधिक गांवों से हो रहा तेज पलायन। गांव की महिलाएं दिन-रात मेहनत कर रही थीं, लेकिन केवल पारंपरिक खेती के भरोसे उनका जीवन संघर्षों से भरा था। कोई उद्योग नहीं, रोजगार के अन्य साधन नहीं और न ही बाजार तक कोई पहुंच। ये समस्याएं इस खूबसूरत हिमालयी क्षेत्र को जकड़े हुए थीं।
विज्ञापन


बबीता ने इस परिस्थिति को एक चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखा। उन्होंने तय किया कि वह न केवल खेती को लाभदायक बनाएंगी, बल्कि गांव की महिलाओं को भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करेंगी। स्थानीय लोगों से संवाद के बाद उन्होंने महसूस किया कि फसलों का चयन, जंगली जानवरों की समस्या, तकनीकी ज्ञान की कमी और बाजार तक पहुंच की बाधाएं क्षेत्र की मुख्य कृषि समस्याएं थीं।
विज्ञापन


गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की ठानी

बबीता ने गांव की कुछ महिलाओं के साथ मिलकर गेहूं और धान की पारंपरिक खेती के साथ-साथ दमास्क गुलाब, कैमोमाइल, बिछुआ, रोजमेरी, करी पत्ता जैसी सुगंधित एवं औषधीय फसलों की खेती भी शुरू की। इन फसलों की खासियत थी कि ये जलवायु के अनुकूल थीं, जंगली जानवरों से सुरक्षित रहती थीं और बाजार में इनकी अच्छी मांग थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


खेती को लाभदायक बनाने का प्रयास

बबीता ने देहरादून के सेंटर फॉर एरोमेटिक प्लांट्स (सीएपी) से पौधे मंगवाए और अपनी बचत से सिंचाई के लिए दो किलोमीटर लंबी पाइप लाइन डाली। खेत जोतने के लिए उपकरण खरीदे और स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण के साथ काम पर लगाया। 2022 में उन्होंने गुलाब जल, हाइड्रोसोल, हल्दी, अदरक, मधु आदि का उत्पादन शुरू किया, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती थी बाजार तक पहुंचने की। शुरुआत में स्थानीय बाजार से काम चला, लेकिन बिक्री सीमित थी और लागत अधिक। उन्होंने इस समस्या का हल निकाला रूरल बिजनेस इनक्यूबेटर (आरबीआई) के साथ जुड़कर, जहां से उन्हें मार्केटिंग और प्रशिक्षण की मदद मिली। धीरे-धीरे दिल्ली जैसे शहरों तक उनके उत्पादों की पहुंच बन गई।

मधुमक्खी पालन किया

बबीता ने मधुमक्खी पालन भी शुरू किया, जिससे शुद्ध हिमालयी शहद का उत्पादन हुआ और 100 प्रतिशत जैविक, रसायन मुक्त खेती बबीता की सबसे बड़ी पहचान बन गई। आज बबीता की पहल से 11 स्थायी कर्मचारी जुड़ी हुई हैं और पास के गांवों की महिलाएं भी समय-समय पर इस पहल से जुड़ती रहती हैं। ये महिलाएं अब आत्मनिर्भर हैं, उनकी आमदनी बढ़ी है और सबसे अहम उनकी पहचान बनी है।

बबीता बताती हैं, “इस मॉडल ने पलायन की रफ्तार धीमी की, गांव में रोजगार के अवसर पैदा किए और समाज में सकारात्मक सोच को जन्म दिया। शुरुआत आसान नहीं थी। दुर्गम स्थान, खराब सड़कें, जल स्रोत की कमी, जंगली जानवरों का खतरा और स्थानीय लोगों की आशंकाएं, इन सबसे निपटना पड़ा।” हालांकि संसाधनों की कमी होने पर भी बबीता ने हार नहीं मानी, जिसमें उनके पति और बहन ने उनका सबसे अधिक साथ दिया।

एग्रो टूरिज्म को बढ़ावा देना लक्ष्य

आज गांव की सोच बदल चुकी है। जहां कभी लोग शंका करते थे, वहीं अब वे सलाह मांगते हैं। बबीता की 11 सदस्यीय टीम में खेती, उत्पादन, पैकेजिंग, मार्केटिंग और सोशल मीडिया जैसे हर क्षेत्र के लोग हैं। उन्होंने टीम के भीतर ‘स्वामित्व की भावना’ विकसित की, जिससे हर व्यक्ति कंपनी की सफलता में खुद को सहभागी समझता है। मासिक बैठक, प्रशिक्षण और प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली के जरिए टीम की कार्य-कुशलता बढ़ी है।


बबीता कहती हैं, “मेरा लक्ष्य एग्रो-टूरिज्म को बढ़ावा देना भी है, जहां पर्यटक खेती, ट्रेकिंग, नदी राफ्टिंग जैसी गतिविधियों का आनंद ले सकें। इससे न सिर्फ गांव में रोजगार बढ़ेगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी एक नई दिशा मिलेगी।“
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed