Padwoman: मिलिए भारत की पैड वुमेन माया विश्वकर्मा से, अमेरिका से नौकरी छोड़ बनीं गांव की सरपंच
Padwoman Maya Vishwakarma: मध्य प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में महिलाओं की स्थिति मजबूत होती दिखाई दी। 570 सरपंच निर्विरोध निर्वाचित हुए, जिसमें से 380 महिलाएं हैं। इन महिला सरपंचों में 21 साल की महिलाएं शामिल हैं तो वहीं 79 साल बुजुर्ग महिला भी शामिल है। 79 वर्षीय बुजुर्ग रामरानी सबसे अधिक उम्र की महिला सरपंच हैं। इन सभी को निर्विरोध चुना गया है। वहीं एक महिला सरपंच तो ऐसी भी हैं जो अमेरिका से पढ़ाई करके आईं हैं। अमेरिका से वापस आई माया विश्वकर्मा किसी पहचान की मोहताज नहीं। वह भारत में पैड वुमेन या पैड जीजी के नाम से भी मशहूर हैं। ग्रामीणों के विकास और स्वास्थ्य के लिए उनके प्रयासों और कार्यों के चलते हुए निर्विरोध सरपंच चुना गया है। चलिए जानते हैं मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव की महिला सरपंच माया विश्वकर्मा के बारे में, क्यों हैं पैड वुमैन के नाम से मशहूर।
कौन हैं माया विश्वकर्मा
माया विश्वकर्मा को मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के साईं खेड़ा तहसील में निर्विरोध सरपंच चुना गया है। माया विश्वकर्मा ने अपनी शिक्षा अमेरिका से पूरी की है। उन्होने साल 2008 में पीएचडी की थी। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को में ब्लड कैंसर पर रिसर्च करके लौटी माया विश्वकर्मा अमेरिका में एक अच्छी जिंदगी जी रही थीं। हालांकि अपने देश- प्रदेश के विकास के लिए कार्य करने का जज्बा उन्हें वापस भारत ले लाया।
माया विश्वकर्मा ने अमेरिका की छोड़ी नौकरी
स्वदेश वापसी के बाद माया विश्वकर्मा ने गरीब लोगों के लिए काम करना शुरू किया। इसके लिए उन्होंने अमेरिका में अपनी नौकरी भी छोड़ दी। उन्हें लगा कि राजनीति में आकर वह समाज के लिए कुछ सार्थक कर सकेंगी। इसी सोच के साथ साल 2014 में माया ने आम आदमी पार्टी के टिकट से नर्मदापुरम लोकसभा क्षेत्र (नरसिंहपुर-होशंगाबाद संसदीय क्षेत्र) से चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
क्यों पैड वुमेन के नाम से मशहूर
माया विश्वकर्मा को पैड जीजी व पैड वुमेन के नाम से भी जाना जाता है। सुकर्मा फाउंडेशन के जरिए माया विश्वकर्मा समाजसेविका के तौर पर कार्य करती हैं। महिलाओं को मासिक धर्म, हाइजीन और स्वास्थ्य को लेकर जागरूक करने के लिए वह कार्य करती हैं। गांवों और कस्बों में जाकर गरीब बस्तियों की महिलाओं को माहवारी के दौरान होने वाली समस्याओं के बारे में जागरूक करती हैं।
उनकी समाजसेवा और जागरूकता कार्यक्रमों के कारण माया विश्वकर्मा को कई सामाजिक पुरस्कार भी मिल चुके हैं। उन्होंने अरुणाचलम भारत के पैडमैन मुलाकात करके प्रेरणा ली और गांव में सेनेटरी पैड बनाने का काम शुरू किया।

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