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Padma Shri Yanung Jamoh Lego: जड़ी-बूटियों की रानी हैं पद्मश्री यानुंग जामोह, 30 वर्षों से कर रहीं मुफ्त इलाज
Fri, 14 Nov 2025 12:52 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Fri, 14 Nov 2025 12:52 PM IST
सार
Padma Shri Yanung Jamoh Lego :यानुंग जामोह 30 वर्षों से जंगलों की दवा, मिट्टी की महक और पूर्वजों के ज्ञान को एक धरोहर की तरह संभाल रही हैं। उनके इसी असाधारण योगदान के लिए उन्हें 2024 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
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यानुंग जामोह लेगो
- फोटो : Instagram
विस्तार
Padma Shri Yanung Jamoh Lego: अरुणाचल प्रदेश के घने जंगलों में एक लड़की कभी अपने माता-पिता के साथ औषधीय पौधों की तलाश में घंटों भटकती थी। वही लड़की आज 59 वर्ष की एक ऐसी महिला बन चुकी है, जिसकी विरासत लाखों दिलों को दिशा देती है। यानुंग जामोह लेगो पूर्वी पूर्वी सियांग जिले में रहती हैं। वह बीते 30 वर्षों से जंगलों की दवा (Traditional Medicine), मिट्टी की महक और पूर्वजों के ज्ञान (Herbal Healer) को एक धरोहर की तरह संभाल रही हैं। उनके इसी असाधारण योगदान के लिए उन्हें 2024 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
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यानुंग जामोह लेगो का शुरूआती जीवन
आदी समुदाय की पांरम्पारिक चिकित्सा पद्धति पीढ़ियों में बसती रही है और यानुंग उसी विरासत की अगली कड़ी थीं। बचपन में वह अपने माता-पिता को जड़ी-बूटियां पहचानते, उन्हें सुखाते, मिलाते और बीमार लोगों का इलाज करते देखती रहीं। धीरे-धीरे पौधों से रिश्ता मजबूत होता गया और यही रिश्ता आज उनका जीवन बन चुका है।
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तीन दशक का संघर्ष
यानुंग जामोह ने पिछले 30 वर्षों में 10,000 से अधिक लोगों का इलाज अपनी जड़ी-बूटियों से किया है। साल दर साल वह 5,000 से अधिक औषधीय पौधों का रोपण करती हैं क्योंकि उनके लिए प्रकृति सिर्फ उपयोग की चीज़ नहीं, बल्कि दायित्व है। यह सेवा मुफ्त है। न पैसे की मांग और न शोहरत की चाह, बस लोगों का दर्द कम होता रहे, लोकज्ञान जीवित रहे। पारंपरिक इलाज को लेकर विरोध, झूठे मुकदमे, सामाजिक दबाव सब कुछ उन्होंने झेला। लेकिन उनकी नींव सदियों पुराने ज्ञान पर टिकी थी। जिसे कोई भय, कोई धमकी हिला नहीं पाई।
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घर-घर तक पहुंचाया हर्बल किचन गार्डन आंदोलन
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है पूर्वी सियांग जिले में हर्बल किचन गार्डन आंदोलन। उनकी प्रेरणा से आज हजारों घरों में छोटे-छोटे जड़ी-बूटी वाले बगीचे हैं, जहां अदरक-हल्दी नहीं, बल्कि दुर्लभ औषधीय पौधों की खेती होती है। यानुंग कहती हैं कि दवा हमेशा बाज़ार में नहीं मिलती। कभी-कभी जंगल ही आपका डॉक्टर होता है।
सरकारी सेवा के साथ विरासत को मजबूत किया
राज्य कृषि विभाग में उप निदेशक के रूप में सेवाएं देते हुए भी उन्होंने अपना मिशन नहीं छोड़ा। वह सरकारी पद और पारंपरिक ज्ञान दोनों को साथ लेकर चलने वाली वह एक अपूर्व उदाहरण हैं।

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