Nepal Kumari: कौन हैं दो साल की आर्यतारा शाक्य? जानिए नेपाल की कुमारी प्रथा की पूरी कहानी
Kumari Aryatara Shakya: आर्यतारा शाक्य के चयन ने एक बार फिर इस प्राचीन परंपरा को चर्चा में ला दिया है। आइए जानते हैं कौन हैं आर्यतारा शाक्य, क्या है कुमारी प्रथा और कैसे एक छोटी बच्ची नेपाल की जीवित देवी बनती है।
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Aryatara Shakya: नेपाल अपनी अनूठी सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इन्हीं परंपराओं में से एक है कुमारी प्रथा, जिसमें छोटी बच्चियों को जीवित देवी मानकर पूजा जाता है। हाल ही में काठमांडू की दो साल की बच्ची आर्यतारा शाक्य को नई कुमारी चुना गया है। नेपाल में कुमारी को देवी तलेजु का अवतार माना जाता है और उन्हें सम्मान, श्रद्धा और पूजन की दृष्टि से देखा जाता है। आर्यतारा शाक्य के चयन ने एक बार फिर इस प्राचीन परंपरा को चर्चा में ला दिया है। आइए जानते हैं कौन हैं आर्यतारा शाक्य, क्या है कुमारी प्रथा और कैसे एक छोटी बच्ची नेपाल की जीवित देवी बनती है।
कौन हैं आर्यतारा शाक्य?
आर्यतारा शाक्य काठमांडू की दो साल आठ माह की बच्ची हैं, जिन्हें कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद नेपाल की नई कुमारी घोषित किया गया है। उनका परिवार पारंपरिक शाक्य समुदाय से ताल्लुक रखता है, जो कुमारी परंपरा में अहम भूमिका निभाता है।
क्या है कुमारी प्रथा?
नेपाल की कुमारी प्रथा सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है। इसमें बौद्ध और हिंदू मान्यताओं का संगम है। कुमारी को देवी *तलेजु भवानी* का अवतार माना जाता है। जब तक बच्ची यौवन अवस्था तक नहीं पहुंचती, तब तक उसे जीवित देवी मानकर पूजा जाता है।
कैसे चुनी जाती है कुमारी?
कुमारी बनने की प्रक्रिया बेहद कठिन और अनोखी होती है। बच्ची के परिवार, जाति और शारीरिक लक्षणों के आधार पर जांच की जाती है। कुमारी के शरीर पर कोई दाग-धब्बा या चोट का निशान नहीं होना चाहिए। साथ ही बच्ची को निर्भीक, शांत और करुणामयी माना जाना चाहिए।
आर्यतारा शाक्य का जीवन कुमारी बनने के बाद
नई कुमारी बनने के बाद आर्यतारा शाक्य अब दरबार में रहेंगी और आम लोगों के लिए देवी के रूप में पूजनीय होंगी। उनके लिए खास निवास स्थान तैयार किया गया है। भक्तगण उनके दर्शन के लिए आते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
कुमारी परंपरा का महत्व
यह परंपरा नेपाल की धार्मिक एकता का प्रतीक है, जहां हिंदू और बौद्ध दोनों समुदाय मिलकर कुमारी की पूजा करते हैं। इसे शक्ति और आस्था का अद्वितीय संगम माना जाता है।

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