National Science Day 2022: ये हैं भारत की पांच महिला वैज्ञानिक, जानिए विज्ञान के क्षेत्र में इनका योगदान
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National Science Day 2022: 28 फरवरी का दिन देश के लिए खास है। हर साल आज के दिन राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। 28 फरवरी को विज्ञान दिवस मनाने की वजह सीवी रमन से जुड़ी है। भारत ही नहीं दुनिया के जाने माने वैज्ञानिक सर सीवी रमन ने साल 1928 में अपनी खोज रमन प्रभाव (रमन इफेक्ट) का ऐलान किया था। उनकी इस खोज को साल 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिकों में से एक सीवी रमन के सम्मान और याद में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। सर सीवी रमन के बाद भी भारत में कई होनहार वैज्ञानिक हुए, जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अपना योगदान दिया। इस योगदान में महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। चलिए जानते हैं भारत की प्रतिष्ठित महिला वैज्ञानिकों के योगदान के बारे में।
भारतीय महिला वैज्ञानिकों के नाम
आनंदीबाई गोपालराव जोशी
भारत की पहली महिला फ़िजीशियन का नाम आनंदीबाई गोपालराव था। 31 मार्च 1865 को पुणे में आनंदीबाई का जन्म हुआ था। छोटी उम्र में शादी और महज 14 साल की उम्र में वह मां बन गई थीं। बाद में दवा की कमी की वजह से उनके नवजात बेटे की मौत हो गई। इसके बाद आनंदीबाई ने दवाइयों पर रिसर्च शुरु की। उनके पति ने भी इस कदम में उनका साथ दिया और विदेश जाकर मेडिसिन की पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। आनंदीबाई ने पेंसिलवेनिया के महिला मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की।
डाॅ. जानकी अम्माल
केरल के तेल्लीचेरी (वर्तमान में थालास्सेरी) में 4 नवंबर 1897 को जानकी अम्माल का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। जानकी के पिता मद्रास सूबे के उप न्यायाधीश थे। डाॅ, जानकी देश की पहली महिला वैज्ञानिक थीं, जिन्हें पद्मश्री सम्मान मिला था। उन्होंने बॉटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर के पद पर अपनी सेवा दी थी।
कमला सोहोनी
इंदौर में 14 सितंबर 1912 में जन्मी कमला सोहोनी प्रोफेसर सीवी रमन की पहली महिला शिष्या थीं। कमला सोहोनी को पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाली देश की पहली महिला वैज्ञानिक भी थीं। हर प्लांट टिशू में ‘साइटोक्रोम सी’ नाम के एंजाइम की खोज कमला सोहोनी ने ही की थी।
बिभा चौधरी
कलकत्ता में साल 1913 में बिभा चौधरी का जन्म हुआ। कलकत्ता विश्वविद्यालय से बिभा ने भौतिक विज्ञान में एमएससी की डिग्री हासिल करने वाली वह पहली महिला थीं। इसके बाद होमी जहांगीर भाभा और विक्रम साराभाई के साथ काम किया। बिभा चौधरी ने देवेन्द्र मोहन बोस के साथ मिल कर बोसोन कण की खोज की।
असीमा चटर्जी
23 सितंबर 1917 को कलकत्ता, बंगाल में एक मध्यवर्गीय परिवार में असीमा चटर्जी का जन्म हुआ था। उनके पिता मेडिसिन डॉक्टर थे। असीमा ने कोलकाता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज से रसायन विज्ञान में स्नातक किया था। भारतीय जैविक रसायन शास्त्री असीमा चटर्जी ने कार्बनिक रसायन और मेडिसिन के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया था। असीमा ने मिर्गी के दौरे के लिए दवा और एंटी मलेरिया ड्रग्स को विकसित किया था।

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