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बेटी को जन्म देने पर ससुरालवालों ने जिस बहू को घर से निकाला, जज बनकर वही देगी पीड़ितों को न्याय

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 21 Dec 2019 08:31 AM IST
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वंदना मधुकर
वंदना मधुकर - फोटो : Amar ujala

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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर स्त्री सशक्तीकरण के तमाम नारों और जागरूकता संदेशों के बावजूद समाज में बेटी-बहुओं की प्रताड़ना कम नहीं हुई है। इस प्रताड़ना से हार नहीं मानते हुए कई बेटियां अपनी मेहनत के दम पर ऐसा मुकाम हासिल कर ले रही हैं कि उसे दुत्कारने वाले समाज के मुंह पर ताला लग जा रहा है।
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आज बिहार के जिस बेटी की हम बात करने जा रहे हैं, वह एक बहु भी है और एक बेटी की मां भी। पटना के छज्जूबाग की 34 वर्षीय वंदना मधुकर को ससुरालवाले उसके सांवले रंग को लेकर ताना मारते रहे, दुत्कारते रहे। पति चाहता था कि वंदना अपनी पूरी सैलरी सीधे लाकर उसके हाथों में दे दे। इतना ही नहीं, जब वंदना ने एक बेटी को जन्म दिया तो ससुरालवालों ने उसे घर से निकाल दिया।
वंदना ने हार नहीं मानी। उसने अपने मायके में रहकर बेटी का पालन-पोषण भी किया। नौकरी के साथ अपनी उच्चतर शिक्षा जारी रखी और स्टेट ज्यूडिशियरी की परीक्षा पास कर जज बन गई। ससुराल से निकाले जाने के बाद संघर्ष और मजबूत हौसले की बदौलत जज बन चुकी वंदना की सफलता अब माता-पिता के साथ पूरे मोहल्ले और समाज के लिए गर्व का विषय बन गई है।
 
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