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Mission Shakti: पोलियो को हराकर मिशन शक्ति की सशक्त मिसाल बनीं एटा की हिना नाज
Mon, 29 Sep 2025 04:51 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Mon, 29 Sep 2025 04:51 PM IST
सार
Mission Shakti: हिना नाज़ रोज़ सुबह घर से निकलकर कासगंज कार्यालय पहुंचती हैं। रोजाना 150 किलोमीटर की दौड़ लेकिन न ठंड उन्हें रोकती है, न तपती धूप। उनका एक ही संकल्प है, किसी भी पात्र महिला को योजनाओं से वंचित न रहने देना।
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हिना नाज एटा
- फोटो : mission Shakti
विस्तार
Mission Shakti: कठिनाइयां जब हौसलों से टकराती हैं, तो इतिहास बनता है। कुछ ऐसी ही कहानी है एटा जिले की रहने वाली हिना नाज की। हिना ने मिशन शक्ति अभियान के तहत नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की बेहतरीन मिसाल पेश की। बचपन से एक पैर से पोलियोग्रस्त होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। कासगंज जिला प्रोबेशन कार्यालय में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हिना साहस और सेवा-भावना की जीती-जागती मिसाल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महिला सशक्तीकरण मुहिम ने हिना जैसे समर्पित महिलाओं को नारी शक्ति के रूप में सशक्त किया, जो पीड़ित महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं।
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कौन हैं हिना नाज?
हिना नाज एटा जिले के कस्बा सकीब में मोहल्ला पोस्तीखाना की रहने वाली हैं। हिना नाज़ रोज़ सुबह घर से निकलकर कासगंज कार्यालय पहुंचती हैं। रोजाना 150 किलोमीटर की दौड़ लेकिन न ठंड उन्हें रोकती है, न तपती धूप। उनका एक ही संकल्प है, किसी भी पात्र महिला को योजनाओं से वंचित न रहने देना। जिला प्रोबेशन कार्यालय में आने वाली महिलाओं के लिए वे अब सहारा और उम्मीद का प्रतीक बन चुकी हैं। हिना स्वयं दस्तावेजों का सत्यापन करती हैं, कंप्यूटर फीडिंग का पूरा कार्य संभालती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि हर पात्र महिला को समय पर पेंशन मिले।
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शारीरिक सामर्थ्य नहीं, दृढ़ मनोबल से बनी मिसाल
उनकी कार्यशैली में ईमानदारी और संवेदनशीलता झलकती है। जब उन्होंने शुरुआत की थी, तब जिले में केवल करीब 8,000 महिलाएं निराश्रित महिला पेंशन योजना का लाभ उठा रही थीं। लेकिन उनके अथक प्रयासों और लगन से सितम्बर 2025 तक यह संख्या 26,928 तक पहुंच गई। साथ में यूपी सरकार की और स्पॉन्सरशिप योजना के तहत बच्चों को योजना का लाभ दिलाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ रही हैं। यह उपलब्धि बताती है कि यदि निष्ठा और लगन हो, तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। असली शक्ति शारीरिक सामर्थ्य में नहीं, बल्कि मनोबल और आत्मविश्वास की दृढ़ता में होती है।
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हिना मानती हैं कि शारीरिक चुनौतियां इंसान की शक्ति को परिभाषित नहीं करतीं। वो कहती हैं कि “खुश रहने के लिए किसी सहारे की आवश्यकता नहीं होती, बस खुद पर भरोसा होना चाहिए।” उन्होंने अपने संघर्ष को ही अपनी शक्ति बनाया और आज हज़ारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखा रही हैं।
हजारों महिलाओं को संबल दे रहीं हिना
महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी हिना की मेहनत और सकारात्मक ऊर्जा हर एटा और कासगंज दोनों जिलों की महिलाओं को संबल देती है। उनके प्रयासों से प्रभावित होकर अब अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेती हैं और मार्गदर्शन प्राप्त करती हैं। आज हिना नाज़ न केवल कासगंज और एटा की ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं। वे यह सिखाती हैं कि यदि मन में सेवा की भावना और कार्य के प्रति निष्ठा हो, तो कोई भी कठिनाई रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती।

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