मीरा बेन: महात्मा गांधी ने अंग्रेज महिला को पहली ही मुलाकात में बना लिया था बेटी, जानिए वजह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत की महिलाएं हमेशा से सशक्त रही हैं, बस उन्हें एक मौके और प्रोत्साहन की जरूरत रहती है। आज की महिलाएं हर काम, हर क्षेत्र में निपुण हैं लेकिन भारत के इतिहास में भी कई महिलाओं का जिक्र है जिन्होंने देश के लिए कुछ ऐसा कर दिखाया कि वह प्रेरणा बन गईं। हम बात कर रहे हैं मीरा बेन की। अधिकतर लोगों ने शायद ये नाम न सुना हो लेकिन मीरा बेन के बारे में हर भारतीय को जानना चाहिए। मीरा बेन एक ब्रिटिश महिला थीं लेकिन गांधी जी से उनका गहरा नाता था। एक ब्रिटिश महिला ने कुछ ऐसा कर दिखाया कि गांधी जी ने उसे भारतीय नाम दिया। बापू ने मीरा बेन को अपनी बेटी बना लिया। मीरा बेन भी ऐशो-आराम की जिंदगी छोड़ भारत की होकर रह गई। चलिए जानते हैं कौन हैं मीरा बेन और भारत में उनके योगदान व गांधी जी से उनके रिश्ते के बारे में।
मीरा बेन कौन थीं
मीरा बेन या बहन का जन्म इंग्लैंड में साल 1892 को 22 नवंबर के दिन हुआ था। उनका असली नाम मेडेलीन स्लेड था। मेडेलीन मुंबई के नौसेना के ईस्ट इंडीज स्क्वाड्रन में कमांडर इन चीफ के पद पर तैनात सर एडमंड स्लेड की बेटी थीं। मेडेलीन को प्रकृति से काफी प्रेम था। उन्होंने अलग अलग भाषाएं सीखी थीं, जिसमें हिंदी भी शामिल थी। मेडेलीन ने गांधी जी पर लिखे साहित्य को पढ़ा तो उनसे काफी प्रभावित हुईं।
गांधी जी से मीरा बेन की मुलाकात
बाद में 1925 में वह भारत आई, तब उनकी मुलाकात गांधी जी से हुआ। मीरा बेन ने अपनी आत्मकथा “द स्पिरिट्स पिलग्रिमेज” में उनकी और महात्मा गांधी की पहली मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया है कि उस समय महात्मा गांधी ने उनसे कहा था कि तुम मेरी बेटी बनकर रहोगी। स्वतंत्रता संग्राम में मेडेलिन ने भी अपना जीवन समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी ने उन्हें मीरा बेन नाम दिया। मीरा बेन ने भारत को ही अपना घर बना लिया।
मीरा बेन का योगदान
उत्तर प्रदेश के मुलदास पुर में किसान आश्रम की स्थापना में उनका ही योगदान रहा। वह गांधी जी के साथ जेल तक गईं। एक संभ्रांत परिवार की लड़की सादी धोती और जमीन पर सोने लगी।
मीरा बेन को मिला सम्मान
उनके योगदान के लिए आजादी के बाद साल 1982 में देश की ओर से पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। हालांकि मीरा बेन तब तक देश छोड़कर जा चुकी थीं और वियना के एक गांव में बस गईं थी। इसलिए ये उपाधि लेने भारत नहीं आ सकीं। भारतीय राजदूत खुद वियना में उनके पास गए और उन्हें ये सम्मान देकर आए। इसके अलावा मीरा बेन के नाम पर एक डाक टिकट भी जारी किया जा चुका है। 20 जुलाई 1982 में मीरा बेन की मृत्यु हो गई।

कमेंट
कमेंट X