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Rajani Paranjpe: इस महिला ने शुरू किया चार पहियों पर चलने वाला अनोखा स्कूल, जानिए रजनी परांजपे के बारे में

Fri, 15 Nov 2024 04:46 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Fri, 15 Nov 2024 04:46 PM IST
सार

अपने सराहनीय कार्यों के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित इस महिला का नाम रजनी परांजपे है। आइए जानते हैं रजनी परांजपे कौन हैं और क्या है उनकी उपलब्धि।

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Meet Rajani Paranjpe Owner Of Door Step School in Maharashtra In Hindi
रजनी परांजपे - फोटो : Instagram

विस्तार

Rajani Paranjpe: शिक्षा हर किसी का मूल अधिकार है लेकिन भारत जैसे देश में अभी भी बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। कारण है उनकी आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक स्थिति। कई बच्चे ऐसे हैं जो पढ़ना चाहते हैं लेकिन स्कूल तक नहीं जा सकते। इनमें मजदूरों के बच्चे या जरूरतमंद बच्चे शामिल हैं। जरूरतों को पूरा करने के लिए उनका बचपन पढ़ाई से दूर होता जा रहा है। ऐसे ही बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए एक ऐसा स्कूल है जो कि बच्चों के पास खुद चलकर जाता है। फुटपाथ, सड़क निर्माण क्षेत्रों, निर्माणाधीन इमारत स्थलों तक स्कूल पहुंचता है। इस स्कूल को शुरू करने का श्रेय एक महिला को जाता है। इस महिला ने 100 फीसदी साक्षरता दर को वास्तविक बनाने का संकल्प लिया और अग्रसर हुई। अपने सराहनीय कार्यों के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित इस महिला का नाम रजनी परांजपे है। आइए जानते हैं रजनी परांजपे कौन हैं और क्या है उनकी उपलब्धि।

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कौन हैं रजनी परांजपे?

रजनी परांजपे महाराष्ट्र की रहने वाली हैं और पेशे से शिक्षिका हैं। रजनी परांजपे को रजनी ताई के नाम से जाना जाता है। वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं जिन्होंने ने बच्चों की पढ़ाई के लिए सकारात्मक कदम उठाए। रजनी ने स्कूल शुरू किया जहां बच्चे पढ़ने नहीं आते, बल्कि उनका स्कूल बच्चों के पास उन्हें पढ़ाने के लिए जाता है।
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रजनी परांजपे को महाराष्ट्र की नायक कहा जाता है। उन्होंने सोशल वर्क की पढ़ाई की। बाद में मुंबई के एक कॉलेज में सोशल वर्क की शिक्षिका के तौर पर काम किया। मगर मन में हमेशा से शिक्षा से वंचित बच्चों के लिए कुछ करने की भावना थी। इस दौरान 100 फीसदी साक्षरता दर को वास्तविक बनाने का संकल्प लिया।
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रजनी से शुरू किया चलता-फिरता स्कूल

इसी संकल्प की पूर्ति के लिए उन्होंने अपना अनोखा स्कूल शुरू किया जो चार पहियों पर चलता है। उनका ये चलता फिरता स्कूल बस के अंदर है। चलने वाला ये स्कूल भिन्न भिन्न किताब-कॉपियों, स्लेट-चाक, पेन-पेंसिल, ब्लैक बोर्ड और पढ़ाने के लिए सभी तरह की चीजों से लैस है।

रजनी कहती हैं, "हम जहां भी बच्चे हैं, वहां जाते हैं और वहीं से कक्षा शुरू करते हैं।"  रजनी के डोर स्टेप स्कूल को जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करने के उद्देश्य से शुरू किया। उन्होंने इसके लिए बस को चुना क्योंकि जिन बच्चों के पास शिक्षा प्राप्त करने के लिए सुविधाएं नहीं हैं, उनके लिए स्कूलों तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती होती है।

डोर स्टेप स्कूल का उद्देश्य

इसी के समाधान के लिए उन्होंने एक ऐसा स्कूल खोला जो बच्चों के पास जाए। इस काम में उनकी सहायता रजनी की एक छात्रा बीना सेठ लश्करी और कॉलेज के अन्य लोगों ने की। उन्होंने इसे एक मिशन बनाया और सब ने मिलकर इसे एक संगठन का रूप दिया। इस संगठन का नाम पड़ा "डोर स्टेप स्कूल"। उनका डोर स्टेप स्कूल बस के जरिए फुटपाथ पर, सड़क निर्माण स्थलों पर, बाजारों में, रेलवे स्टेशनों पर, जहां भी बच्चे होते हैं, पहुंच जाती है।


इस स्कूल ने अपनी स्थापना से अब तक मुंबई और पुणे में हजारों बच्चों तक शिक्षा पहुंचाई है। रजनी परांपजे को शिक्षा को लेकर उनके योगदान और सराहनीय प्रयास के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

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